Kailash Vijayvargiya: मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय एक नए बड़े विवाद में घिर गए हैं। रतलाम में दिए गए उनके एक सार्वजनिक बयान को आधार बनाकर कांग्रेस ने सीधे मुख्य चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। कांग्रेस का दावा है कि विजयवर्गीय ने चुनाव के दौरान अपने हलफनामे में आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी छिपाई है, जो सीधे तौर पर चुनाव रद्द करने का आधार बनता है।
क्या है पूरा विवाद?
दरसअल, विवाद की शुरुआत बीते शनिवार की रात रतलाम में आयोजित एक कार्यक्रम से हुई। यहां मंच से संबोधन के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने अपने बंगाल प्रवास के दिनों को याद करते हुए कहा कि उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल में 38 ‘फर्जी’ मामले दर्ज हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर वे बंगाल जाते हैं, तो उनकी गिरफ्तारी हो सकती है। मंत्री ने यहां तक कहा कि बंगाल में उनका जीवित बचना बजरंगबली की कृपा है।
कांग्रेस का वार
कांग्रेस ने मंत्री के इसी बयान को हथियार बना लिया है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब मंत्री खुद 38 मामलों की बात कबूल कर रहे हैं, तो इंदौर विधानसभा से नामांकन भरते समय उन्होंने इन जानकारियों को क्यों छुपाया? कांग्रेस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, उम्मीदवार को अपने सभी मुकदमों की जानकारी देना अनिवार्य है। ऐसा न करना अयोग्यता की श्रेणी में आता है। मामले को लेकर अधिवक्ता और कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को शिकायत भेजी है। जिसमें उन्होंने आयोग विजयवर्गीय के भाषण और उनके द्वारा जमा किए गए हलफनामे की जांच की जाने की मांग की है। उन्होंने आगे मांग की है कि यदि जानकारी छुपाना सच पाया जाता है, तो उनकी विधानसभा सदस्यता तत्काल रद्द की जाए।
भाजपा की रणनीति और सस्पेंस
फिलहाल इस पूरे सियासी घमासान पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि चुनाव आयोग इस पर कोई कड़ा रुख अपनाता है, तो न केवल विजयवर्गीय की विधायकी खतरे में पड़ सकती है, बल्कि उन्हें मंत्री पद से भी हाथ धोना पड़ सकता है।


