Wednesday, November 4, 2026
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यहां पड़े थे गुरु नानक देवजी के चरण… लगाया था पवित्र दीवान

नगर का नाम पड़ा दीवानगंज

रायसेन/नसीम अली/खबर डिजिटल/ देशभर में गुरु नानक देव जी की 556वीं जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। सिख धर्म के प्रथम गुरु और संत-यात्री गुरु नानक देव जी का जीवन प्रेम, समानता, सेवा और मानवता का एक अद्भुत संदेश देता है। इसी पवित्र अवसर पर हम आपको ऐसी जगह के बारे में बताएंगें, जहां पर गुरु नानक देवजी के चरण पड़े थे।

श्रद्धा का केंद्र बना दीवानगंज
गुरु नानक देव जी की 556वीं जयंती के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित छोटा सा नगर दीवानगंज श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ऐतिहासिक मान्यता है कि अपने यात्राओं (उदासियों) के दौरान गुरु नानक देव जी यहां पधारे थे। कहा जाता है कि उन्होंने यहीं पर एक दिव्य दीवान लगाया था, और अपने पवित्र चरणों के चरण चिह्न स्थापित किए थे, जो आज भी यहां सुरक्षित मौजूद हैं। इसी पवित्र दीवान के कारण ही इस स्थान का नाम आगे चलकर “दीवानगंज” पड़ा। यानी जहां गुरु नानक ने दीवान लगाया, वही आगे चलकर दीवानगंज कहलाया।

यह जुड़ा हुआ है वाक्या
स्थानीय परंपरा के अनुसार, जब लोगों ने जल संकट की समस्या बताई, तो गुरु नानक देव जी की कृपा से यहां जल प्रकट हुआ, और उसी स्थान पर आज प्राचीन बावड़ी स्थित है, जो श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। समय के साथ इस स्थल पर एक गुरुद्वारा का निर्माण किया गया, जहां हर वर्ष गुरु नानक जयंती पर विशेष कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन होता है। भले ही यह स्थान मध्यम प्रदेश के बड़े प्रमुख गुरुद्वारों जितना प्रसिद्ध नहीं है, फिर भी स्थानीय सिख समाज और आसपास के ग्रामीणों के लिए यह अत्यंत पावन धाम है। इस वर्ष 5 नवंबर को गुरु नानक जयंती के शुभ अवसर पर दीवानगंज गुरुद्वारा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर चरण चिह्नों के दर्शन किए, गुरु नानक देव जी का यही संदेश आज भी यहां की हवा में महसूस होता है— ‘न कोई ऊँच, न कोई नीच – सब एक नूर से पैदा हुए हैं। दीवानगंज का यह पावन स्थल न केवल इतिहास का साक्षी है, बल्कि भक्ति, प्रेम और सद्भावना की अनवरत धारा भी है।’

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