डिंडौरी/शैलेश नामदेव/ खबर डिजिटल/ जिले में अवैध खनन पर रोक लगाने के दावों के बावजूद खनन माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद हैं। हालात यह हैं कि प्रशासन के पास पूरी जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई का कहीं अता-पता नहीं है। कई बार शिकायतें पहुंचने के बावजूद विभागों की चुप्पी अब गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है। सूत्र बताते हैं कि इससे पहले जीआरटीसी द्वारा उजागर किए गए अवैध खनन के मामले की जांच अभी अधर में ही लटकी है। उधर शहपुरा–डिंडौरी मार्ग का निर्माण कर रही उदित इंफ्रा कंपनी पर भी बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर राज्य सरकार को लाखों रुपये के राजस्व से वंचित करने का आरोप है। पिछले चार महीनों से बरखोह और दुहनिया क्षेत्र में लगातार ताबड़तोड़ खनन जारी है।
विभागीय उदासीनता ने बढ़ाए संदेह
खनिज विभाग से जब जानकारी मांगी गई तो विभाग ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उदित इंफ्रा की खदान स्वीकृति 28 जून 2025 को समाप्त हो चुकी है। बड़ा सवाल यह है कि स्वीकृति खत्म होने के बाद भी कंपनी खुलेआम बड़े पैमाने पर पत्थर निकालकर क्रेशर कैसे चला रही है? यदि विभाग को यह पता है तो अब तक न नोटिस, न कार्रवाई और न ही कोई जांच—क्या यह विभागीय मौन किसी अनुकंपा का संकेत है?
नियमों की उड़ रही धज्जियां
स्थानीय लोगों के अनुसार कंपनी द्वारा नियमों की परवाह किए बिना अस्थायी क्रेशर प्लांट चलाए जा रहे हैं। न मानकों का पालन किया जा रहा है और न ही पर्यावरणीय स्वीकृतियों का। धूल, शोर और प्रदूषण के बीच बोर्ड व प्रशासन की लापरवाही कई गंभीर शंकाएं पैदा कर रही है—क्या नियम सिर्फ आम नागरिकों के लिए हैं?ं
विस्फोटक का भी बेहिसाब उपयोग
सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि बरखोह और दुहनिया क्षेत्र में लगातार बड़े पैमाने पर विस्फोटक का उपयोग किया जा रहा है, जबकि न तो प्रशासन पूछताछ करता दिख रहा है इन विस्फोटकों को किस अनुमति के तहत उपयोग किया जा रहा है—यह भी एक बड़ा सवाल है। स्थिति यह संकेत देती है कि या तो प्रशासन जानकारी होने के बावजूद अनदेखी कर रहा है, या फिर कोई और कारण विभागों को कार्रवाई से रोक रहा है।


