इंदौर/नरेंद्र महावर/खबर डिजिटल/ इंदौर के भागीरथपुरा जल कांड में अब तक 23 वीं मौत हो चुकी है, जवाब देने के लिए कोई नहीं है कि आखिर इतने लोगों की मौत महज पानी पीने से हो गई, लगता तो कुछ ऐसा है कि अगर ऐसी कोई विपदा पिछले वक्त में आती तो भोपाल के गैस कांड की त्रासदी की तरह एक डिपार्टमेंट बना दिया जाता। लेकिन फिलहाल बात इंदौर के सियासी समीकरण की। दरअसल भागीरथपुरा जलकांड के बाद इंदौर की सियासी हवा भी बदल गई है, अब कांग्रेस भी इतने सालों के बाद मुंह उठाकर बोल सकती है कि बीजेपी के कार्यकाल में गलत तो हुआ है, क्योंकि इंदौर में सांसद, विधायक, महापौर और स्थानीय पार्षद सब बीजेपी के हैं, और अब सालों के बाद जवाब मांगने की मुद्रा में कांग्रेस है।
क्या इसीलिये संघ को करना पड़ा दखल
सालों से संघ की प्रयोगशाला रहा मालवा, खासतौर पर इंदौर, फिलहाल जल त्रासदी से जूझ रहा है, कौन नहीं जानता कि अमूमन इसी तरह की स्थिति लगभग हर जगह है कि साफ पानी के साथ सीवरेज का पानी बह रहा है, जिसका नतीजा भागीरथपुरा के रुप में सामने है, शायद यही कारण है कि समाज के बीच काम करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आगे आना पड़ा, इंदौर के भागीरथपुरा जल कांड पर संघ भी नाराज है, कहा जा रहा है कि आरएसएस के कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाने पर खरी खोटी सुनना पड़ रही है, इसी का नतीजा है कि संघ ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। उन्होंने कलेक्टर और महापौर से चर्चा की।
संघ के प्रांत प्रचारक ने की महापौर, कलेक्टर से चर्चा
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पहुंचे थे। संघ से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दोनों से भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों और प्रशासनिक तालमेल को लेकर बात की गई, हालांकि इसके बाद पीसीसी चीफ जीतू पटवारी समेत कांग्रेस के नेताओं ने कलेक्टर के संघ कार्यालय जाने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। डेढ़ घंटे चली इस मुलाकात में संघ के मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन ने कलेक्टर और महापौर से भागीरथपुरा जलकांड के बारे में जानकारी ली। साथ ही संघ के पुराने प्रचारक होने के चलते महापौर को फटकार भी लगाई गई, हालांकि उसके बाद महापौर भार्गव ने कहा- मैं संघ कार्यालय आता रहता हूं, आज भी सहज ही आया था। हालांकि अब माना जा रहा है कि संघ ने महापौर को बदलाव के लिए फ्री हैंड दे दिया है।
इंदौर में अब कांग्रेस को मिल गया मौका
इंदौर जैसे शहर में सालों से हाशिये चल रही कांग्रेस पार्टी को भागीरथपुरा जल कांड के बाद एक बड़ा मौका मिल गया है। माना जा रहा है कि वर्तमान हालात नगरीय निकाय चुनाव तक रहे तो कांग्रेस एक बार फिर इंदौर की जनता के दिल में जगह बना लेगी, क्योंकि हर कोई व्यक्ति बीजेपी नेताओं की शानौ शौकत और जनता से दूर होते जुड़ाव को लेकर अंदरखानों में नाराज तो है। जिसका फायदा सीधे-सीधे कांग्रेस को मिलना लाजिमी है, लेकिन अब भी गेंद बीजेपी के पाले में ही नजर आ रही है, चूंकि बीजेपी के आला नेता कैलाश विजयवर्गीय स्थिति को संभालने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, जिसके चलते कांग्रेस पार्टी इस मु्द्दे को उठाने में कई हद तक बैकफुट पर नजर आ रही है।
इंदौर में कांग्रेस की राह में ये बनेंगे रोड़ा
इंदौर में भागीरथपुरा जल कांड होने के बाद भी कांग्रेस कई हद तक बीजेपी के नेताओं की लोकप्रियता को लेकर सोचने पर मजबूर है। कांग्रेस के पीसीसी चीफ जरुर इंदौर से आते हैं, फिर भी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़, महेंद्र हार्डिया, महापौर पुष्यमित्र भार्गव की लोकप्रियता होने के चलते वो बौने ही दिखाई दिए, अगर साफ लफ्जों में कहें तो कांग्रेस के उस जमाने के नेता जैसे सज्जन सिंह वर्मा, अश्विन जोशी,पंडित कृपाशंकर शुक्ला जैसे नेताओं की कांग्रेस में कमी है, शायद इसी कांरण कांग्रॅस पार्टी फुल कॉन्फिडेंस में नजर नहीं आ रही है।


