मुंबई : आगामी केंद्रीय बजट 2026 भारतीय एफएमसीजी (FMCG) क्षेत्र के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के हेड ऑफ सेल्स (इंडिया), कृष्णा खटवानी के अनुसार, पिछला साल जीएसटी युक्तिकरण और कम मुद्रास्फीति के कारण उपभोग में सुधार का आधार रहा है। अब अगला बजट यह तय करेगा कि क्या यह सुधार शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एक स्थायी और दीर्घकालिक विकास में बदल पाएगा। उनके विश्लेषण के अनुसार, डिस्पोजेबल आय (खर्च योग्य आय) में वृद्धि और दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर करों का कम होना इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़े ‘लीवर’ साबित होंगे।
जीएसटी 2.0 और आयकर राहत की भूमिका खटवानी का मानना है कि बजट 2026 की पहली प्राथमिकता जीएसटी 2.0 के लाभों को और अधिक गहरा करना होना चाहिए। अक्टूबर 2025 में हुई जीएसटी कटौती ने पहले ही क्रय शक्ति बढ़ाई है, लेकिन अब होम और पर्सनल केयर की शेष श्रेणियों पर भी कर की दरों को कम करने की आवश्यकता है। साथ ही, निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए आयकर में मामूली राहत भी सीधे एफएमसीजी की मांग को बढ़ाती है, क्योंकि ये वर्ग अपनी अतिरिक्त आय का बड़ा हिस्सा अनिवार्य वस्तुओं और छोटे सुख-साधनों (Indulgences) पर खर्च करते हैं।
ग्रामीण और शहरी उपभोग का पुनरुद्धार ग्रामीण भारत वर्तमान में एफएमसीजी वॉल्यूम ग्रोथ का नेतृत्व कर रहा है, जो मुख्य रूप से ₹10 और ₹20 के लो यूनिट पैक्स (LUPs) पर टिका है। बजट में कृषि आय की सुरक्षा और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर निवेश जारी रहने से इस मांग को और गति मिलेगी। दूसरी ओर, शहरी भारत में जहाँ क्विक कॉमर्स तेजी से बढ़ रहा है, वहाँ मध्यम वर्ग को पैकेज्ड फूड्स पर जीएसटी राहत और आयकर लाभ मिलने से वे प्रीमियम और विशिष्ट (Premium & Specialized) उत्पादों की ओर अपग्रेड करने के लिए प्रेरित होंगे।
प्रोत्साहन से स्थिरता की ओर निष्कर्षतः, कृष्णा खटवानी का तर्क है कि अब समय “एकमुश्त प्रोत्साहन” के बजाय “स्थायी उपभोग” पर ध्यान केंद्रित करने का है। बजट 2026 को राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए उपभोक्ताओं के हाथों में अधिक पैसा छोड़ना चाहिए। यदि सरकार व्यापक श्रेणियों के लिए जीएसटी लाभों को सरल बनाती है और ग्रामीण आय के साथ शहरी रोजगार सृजन का समर्थन करती है, तो एफएमसीजी क्षेत्र एक अनियमित सुधार (Unstable Recovery) से हटकर एक लचीले और स्थिर विकास पथ पर अग्रसर होगा।


