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इंदौर में दूषित पानी से हो रही लोगों की मौत! कब सुध लेगी मोहन सरकार?

इंदौर: बाणगंगा के भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोग हो रहे बिमार, कई की हालत गंभीर...

इंदौर/ खबर डिजिटल/ इंदौर में दूषित पानी से हो रही लोगों की मौत! कब सुध लेगी मोहन सरकार? मध्यप्रदेश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर इन दिनों दूषित पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। बाणगंगा क्षेत्र के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 50 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं, जबकि कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार दूषित पानी के सेवन से 2 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, हालांकि प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं की गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते गुरुवार (25 दिसंबर) को जिस पानी की आपूर्ति की गई थी, उसमें असामान्य दुर्गंध थी। आशंका है कि इसी पानी के सेवन से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े। इलाके में फूड पॉयजनिंग और डायरिया जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। पिछले कुछ दिनों में भागीरथपुरा सहित आसपास के क्षेत्रों से भी दूषित पानी की शिकायतें सामने आने लगी हैं।

अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या

दूषित पानी पीने के बाद पहले उल्टी-दस्त की शिकायतें सामने आईं, फिर बुखार और तेज कमजोरी के मरीज बढ़ने लगे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अब तक 50 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। कॉलोनीवासियों का दावा है कि बीमार लोगों की संख्या 100 से भी अधिक हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चार लोगों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

गंदे पानी की बोतल लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन

दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने महापौर सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता हाथों में गंदे पानी की बोतलें लेकर पहुंचे और नगर निगम व महापौर के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए महापौर सचिवालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

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स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम को पूरे इलाके में तैनात कर दिया गया है। भागीरथपुरा में जगह-जगह स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं, जहां दवाइयों का वितरण और मरीजों की जांच की जा रही है। गंभीर मरीजों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने 22 डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम तैनात की है। घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जा रही है। भागीरथपुरा क्षेत्र में लगभग 10 हजार मकान, 350 से अधिक गलियां और करीब 25 हजार की आबादी है। यहां रहने वाले अधिकांश लोग मध्यम और निम्न आय वर्ग से आते हैं। छोटे बच्चे भी दूषित पानी से काफी प्रभावित हुए हैं, जिन पर विशेष रूप से चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं।

सीएमएचओ का बयान

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र के कम से कम 32 लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। उन्होंने कहा, “मरीजों ने बताया है कि दूषित पानी पीने के बाद उन्हें उल्टी-दस्त और शरीर में पानी की कमी की समस्या शुरू हुई।”

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