इंदौर/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ पीएम मोदी ने इंदौर का स्वाद की राजधानी कहा था, लेकिन यह शहर एक और बात के लिए जाना जाता है, कि मिनी मुंबई में कोई भूखा उठता तो है, लेकिन सोता नहीं है, क्योंकि यहां सेवा के कई प्रकल्पों का संसार भी सेवारत है। इसी पर एक वाक्या याद आया कि एक शख्स किसी काम से निकल रहा था, उसके साथ भी एक अन्य व्यक्ति भी था, वक्त था करीब दोपहर 11 बजे का। दोनों ने सोचा कि दिनभर काम में लगे रहेंगे, तो कुछ नाश्ता कर लें, लेकिन जब उन्हें याद आया कि शायद घर जाकर खाना भी नहीं हो पाएगा तो साथी ने सलाह दी कि हम नंदानगर क्षेत्र में है, तो क्यों ना साईं मंदिर पर सालों से चल रहे भंडारे में भोजन ही कर लें, वो भी मात्र 5 रुपये में।
34 सालों से सेवारत समिति
ऊपर जो वाक्या बताया वो बिल्कुल सही है कि इस नेक काम को इंदौर के नंदा नगर स्थित साईं नाथ मंदिर बीते 34 सालों से बखूबी करती आ है, जोकि कोरोना काल में भी नहीं रुका। यहां पर महज 5 रुपये में स्वादिष्ट भरपेट व्यंजनों से भरपूर भोजन दिया जाता है, जोकि कई जरुरतमंदों की जेब को हल्की होने से बचा ही रहा है, बल्कि पौष्टिक भोजन से शरीर की ऊर्जा की कमी को भी पूरा कर रहा है।
1980 से निरंतर चल रही सेवा
भोजशाला के प्रमुख अजय मित्तल हैं वो बताते हैं कि ” उन्हें इसकी प्रेरणा गुजरात की प्रसिद्ध संत माता कनकेश्वरी देवी ने दी, और पूरा सहयोग कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक रमेश मेंदोला और विजय मित्तल का मिला। उन्हीं के सहयोग से साल 1980 में यह धार्मिक और सेवा प्रकल्प विकसित किया गया था। जहां खास से लेकर आम व्यक्ति एक ही लाइन में लगकर बाबा साईं के प्रसाद को ग्रहण करता है। वहीं अब इसका शुल्क महज 5 रुपये तय किया गया है।
भोजशाला की व्यवस्था
भोजनशाला दानदाताओं के जरिए चलती आई है, खासकर जन्मदिन, पुण्यतिथि और अन्य अवसरों पर दान करके या फिर लोगों को भोजन कराकर लोग पुण्य लाभ कमाते हैं। इसके अलावा गुप्त दान के रूप में यहां बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री उपलब्ध करा देते हैं, जिसमें आटा, तेल, मसाले, दाल-चावल आदि शामिल होता है। इसके साथ ही भोजशाला के सेवा के कार्य से कई सेवाभावी स्वयंसेवक और समाजसेवी जुड़े हुए हैं।
शादी विवाह में बचे भोजन की भी व्यवस्था
शहर में किसी भी धार्मिक सामाजिक और मांगलिक कार्यक्रम में जो साफ-शुद्ध भोजन प्रसादी अथवा भोजन सामग्री बच जाती है, उसके लिए मंदिर समिति ने एक वाहन की व्यवस्था की है, जिसके जरिए उन्हें रसोई में लाकर डिपफ्रीजर में रखकर अगले दिन भंडारे में परोसा जाता है। साथ ही समयसीमा कम होने पर अन्य जगहों पर जरुरतमंदों को बांट दिया जाता है। इसके लिए शहरभर से शादी ब्याह के सीजन में सैकड़ों फोन कॉल आते हैं।
कई जरूरतमंद बुजुर्गों का एकमात्र सहारा
साईनाथ मंदिर की भोजशाला में कई बुजुर्ग ऐसे भी आते हैं, जो या तो अकेले हैं या फिर वे भोजन पानी की व्यवस्था करने में असमर्थ हैं, तो ऐसे लोगों के लिए समिति दोनों वक्त के भोजन की व्यवस्था करती है। इसके अलावा जो बुजुर्ग रसोई तक भोजन करने नहीं आ पाते, उनके लिए घर पर भोजन भेजने के अलावा भोजनशाला तक लाने की व्यवस्था भी की जाती है, ताकि गरमागरम भोजन परोसा जा सके।
हर गुरुवार को साईं मंदिर में खिचड़ी प्रसादी का वितरण
इंदौर के नंदा नगर स्थित साईं मंदिर में हर गुरुवार को सुबह आरती के बाद खिचड़ी प्रसादी की व्यवस्था होती है, जबकि प्रमुख उत्सव मकर संक्रांति, गणतंत्र दिवस, दशहरा, कृष्ण जन्मोत्सव समेत पितृपक्ष पर भी भोजन प्रसादी और खिचड़ी प्रसादी की व्यवस्था की जाती है। साथ ही उपवास के दिनों में फरियाली खिचड़ी की व्यवस्था की जाती है, इसीलिये आज दूर-दूर से लोग यहां पर भोजन कर अपनी पेट की आग को बुझाते हैं।


