राकेश यादव/ खबर डिजिटल/सिवनी। जिले के विकासखंड छपारा के अंतर्गत आने वाले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कलार बाकी से शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी की तस्वीर सामने आई । यहां प्राचार्य की घोर लापरवाही और प्रशासनिक शिथिलता के कारण कक्षा 9वीं के छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के वार्षिक परीक्षा परिणामों ने स्कूल प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है।
90 में से सिर्फ 37 छात्र पास
विद्यालय के शैक्षणिक स्तर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कक्षा 9वीं में अध्ययनरत 90 छात्रों में से मात्र 37 छात्र ही सफलता प्राप्त कर सके हैं। आधे से ज्यादा छात्रों का अनुत्तीर्ण होना न केवल स्कूल के लिए बल्कि पूरे शिक्षा विभाग के लिए एक गंभीर चेतावनी है। इस लचर प्रदर्शन का मुख्य कारण विद्यालय के प्राचार्य खोल सिंह धुर्वे की कार्यशैली को माना जा रहा है।
100 किमी का सफर
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि प्राचार्य धुर्वे लखनादौन स्थित अपने निजी निवास से स्कूल आते हैं। लगभग 100 किलोमीटर की दूरी होने के कारण वे कभी समय पर स्कूल नहीं पहुंचते। इतना ही नहीं, उनकी उपस्थिति पूरी तरह अनियमित है। वे हफ्तों स्कूल से नदारद रहते हैं और जब मन होता है, तभी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। कार्यालय समय में उनकी अनुपस्थिति अब एक सामान्य बात बन चुकी है।
अनुशासनहीनता की भेंट चढ़ी पढ़ाई
जब मुखिया ही अनुशासन का पालन न करे, तो अधीनस्थ स्टाफ पर लगाम कसना नामुमकिन हो जाता है। प्राचार्य की अनुपस्थिति के कारण शिक्षकों की मॉनिटरिंग बंद हो गई, जिससे शिक्षण कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया। इसी अव्यवस्था का परिणाम आज शर्मनाक रिजल्ट के रूप में सबके सामने है।
आक्रोश में अभिभावक
बच्चों के भविष्य से हो रहे इस खिलवाड़ को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है। अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी और प्रशासन से मांग की है कि दोषी प्राचार्य के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और स्कूल में नियमित पठन-पाठन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।


