Jeetu Patwari Latter: मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मध्य प्रदेश दौरे के दौरान एक पत्र भेजा है। पटवारी ने देश की प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति के जीवन संघर्ष को बताते हुए सूबे के लगभग 1.53 करोड़ आदिवासी समाज की जल, जंगल, जमीन, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं को ध्यान आकर्षित किया है। इस पत्र के माध्यम से कांग्रेस ने मध्य प्रदेश सरकार की आदिवासी कल्याण से जुड़ी नीतियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
शिक्षा का बड़ा संकट
पटवारी ने लिखा कि जहां मध्य प्रदेश की सामान्य साक्षरता दर 70 प्रतिशत से अधिक है, वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग में यह आज भी महज 50 प्रतिशत के आसपास रुकी है। झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, मंडला और डिंडौरी जैसे आदिवासी बाहुल्य जिलों के स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पद रिक्त पड़े हैं।
स्वास्थ्य और सहरिया जनजाति
पत्र में आरोप लगाया गया है कि सुदूर वन क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों का भयंकर टोटा है। सहरिया जैसी अत्यंत कमजोर जनजातीय समूहों में टीबी, एनीमिया और कुपोषण राष्ट्रीय चिंता का विषय बने हुए हैं, जहां आज भी इलाज के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
रखीं 10 विधिक मांगें
जीतू पटवारी ने महामहिम राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे अपने मध्य प्रदेश प्रवास के दौरान केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित न रहकर आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद करें और राज्य की डॉ. मोहन यादव सरकार को इन 10 बिंदुओं पर निर्देश जारी करें।
विशेष आपात योजना: आदिवासी अंचलों के लिए तत्काल प्रभाव से ‘विशेष शिक्षा एवं स्वास्थ्य आपात योजना’ लागू की जाए।
समयबद्ध विधिक भर्ती: स्कूलों और अस्पतालों में खाली पड़े शिक्षकों, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के पदों को समयसीमा में भरा जाए।
वनाधिकार का शत-प्रतिशत पालन: वनाधिकार कानून का विधिक क्रियान्वयन कर आदिवासियों को उनकी जमीनों पर सामुदायिक हक दिया जाए।
समीक्षा आयोग का गठन: आदिवासी समाज की वास्तविक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा आयोग बनाया जाए।
बजट का पारदर्शी उपयोग: अनुसूचित जनजाति उपयोजना (TSP) के फंड का डायवर्जन रोका जाए और उसका पारदर्शी विधिक उपयोग हो।
पेसा (PESA) कानून का वास्तविक क्रियान्वयन: ग्राम सभाओं के विधिक अधिकारों को केवल कागजों पर रखने के बजाय उन्हें धरातल पर वास्तविक शक्ति दी जाए।
राजनैतिक गलियारों में मची खलबली
राजनैतिक जानकारों का मानना है कि महामहिम राष्ट्रपति को लिखे गए इस पत्र के जरिए कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की कुल 21 प्रतिशत आदिवासी आबादी के बीच अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने का एक बड़ा रणनीतिक दांव चला है। पत्र के आखिरी पैराग्राफ में पटवारी ने लिखा है कि मध्य प्रदेश का आदिवासी समाज दया नहीं, अधिकार चाहता है, आश्वासन नहीं, अवसर चाहता है, प्रतीकात्मक सम्मान नहीं, वास्तविक भागीदारी चाहता है।

