झाबुआ/ सुनील डाबी/ खबर डिजिटल/ जनपद पंचायत मेघनगर के अंतर्गत ग्राम पंचायत अगराल में सीसी रोड निर्माण के लिए सरकारी राशि बैंक खाते से पहले ही निकाल ली गई थी, लेकिन लंबे समय तक निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ। जब ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने खबर डिजिटल को सूचना दी, जिसके बाद मामला उजागर हुआ और जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटी।
मीडिया में खबर चलने के बाद ताबड़तोड़ तरीके से रोड निर्माण का कार्य शुरू तो कर दिया गया, लेकिन ग्रामीणों ने गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जो राशि दर्शाई गई, उसके अनुरूप काम हुआ ही नहीं, बल्कि केवल लीपापोती करके सड़क तैयार कर दी गई।

जांच की रफ्तार कछुआ चाल, दोषियों को बचाने का आरोप
इस गंभीर मामले पर जनपद सीईओ मेघनगर द्वारा जांच टीम तो गठित की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई। ग्रामीणों का कहना है कि अगर राशि आहरण का समय पर पता नहीं चलता, तो शायद आज भी सड़क नहीं बनती।
उन्होंने यह भी कहा कि सड़क की गुणवत्ता बेहद खराब है और नाप-जोख के बिना ही काम चला दिया गया। साथ ही सरपंच और सचिव द्वारा यह अफवाह फैलाई गई कि सड़क को लेकर विवाद था, जबकि ग्रामीणों ने इसे सिरे से नकारा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जांच टीम निष्पक्ष नहीं, बल्कि दोषियों को बचाने में जुटी है। उनका सवाल है कि जब जिस विभाग की शिकायत है, वही जांच करेगा, तो निष्पक्षता की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

*“पंचायत दर्पण” पोर्टल पर दर्ज है राशि आहरण का प्रमाण
ग्रामीणों ने बताया कि “पंचायत दर्पण” पोर्टल पर साफ-साफ राशि आहरण का रिकॉर्ड मौजूद है, जो अपने आप में सबसे बड़ा सबूत है। फिर भी अब तक न तो कोई इंजीनियर, न ही जनप्रतिनिधि या पंचायत सचिव पर कोई कार्रवाई हुई है।
यह सिर्फ अगराल की बात नहीं है, ग्रामीणों का मानना है कि ऐसी स्थिति कई पंचायतों में बनी हुई है, जहाँ पहले राशि निकाल ली जाती है और काम बाद में किया जाता है, वो भी खानापूर्ति की तरह।
ग्रामीणों की मांग: कलेक्टर करें निष्पक्ष जांच
रहवासियों ने जिला कलेक्टर श्रीमती नेहा मीणा से आग्रह किया है कि वे स्वयं इस मामले को संज्ञान में लेकर एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच टीम गठित करें, ताकि असली दोषियों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो इस तरह की गड़बड़ियां अन्य पंचायतों में भी लगातार दोहराई जाएंगी, जिससे जनता के पैसे की बर्बादी होती रहेगी।


