झाबुआ /सुनील डाबी/खबर डिजिटल/ जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियाँ एक बार फिर दर्दनाक तरीके से उजागर हुईं। मेघनगर के वार्ड क्रमांक 7 में प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक महिला को समय पर जननी एक्सप्रेस और 108 एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण परिवारजनों को उसे ठेले पर अस्पताल ले जाना पड़ा। यह घटना न केवल प्रशासन की संवेदनहीनता, बल्कि एम्बुलेंस संचालन करने वाली एजेंसी की लापरवाही की भी पोल खोलती है।
कॉल करते रहे, मदद नहीं मिली — एम्बुलेंस नहीं पहुँची
परिजनों ने बताया कि महिला की हालत गंभीर होने पर उन्होंने तुरंत 108 और जननी एक्सप्रेस को फोन किया। कॉल रिसीव होने के बावजूद लंबे इंतज़ार के बाद भी वाहन नहीं पहुँचा।
मजबूर परिवार ने खुद ठेला ढूँढा और उसे धक्का देते हुए अस्पताल के दरवाज़े तक पहुँचे। रास्ते भर महिला दर्द से चीखती रही, जबकि आसपास के लोग व्यवस्था पर आक्रोश जताते रहे।
स्थानीयों में तीखा रोष — “एजेंसी सिर्फ कागज़ों में चल रही है गाड़ियाँ”
ग्रामीणों का कहना है कि एम्बुलेंस सेवा चलाने वाली एजेंसी की कार्यप्रणाली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
लोगों ने आरोप लगाया कि —कई बार कॉल के बाद भी वाहन उपलब्ध नहीं होता
चालक फोन नहीं उठाते
एम्बुलेंस अक्सर “रिपेयरिंग” में दिखाकर खड़ी रहती है और ज़मीनी स्तर पर मॉनिटरिंग बेहद कमजोर है लोगों ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि लंबे समय से जारी लापरवाही का नतीजा है।
एजेंसी पर कार्यवाही की माँग तेज — “जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई हो”
स्थानीयों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से यह माँग की है कि—एम्बुलेंस संचालन करने वाली एजेंसी की तत्काल जाँच की जाए कॉल लॉग, वाहन मूवमेंट और चालक की ड्यूटी की जाँच हो और दोषी पाए जाने पर एजेंसी पर अनुबंध समाप्ति तक की कार्रवाई की जाए लोगों का कहना है कि जब संवेदनशील सेवाओं का संचालन निजी एजेंसी को सौंपा गया है, तो उनकी जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।
व्यवस्था की पोल खुली — प्रसूता को ठेले पर ले जाना पड़ा
यह घटना दिखाती है कि सरकारी योजनाएँ जैसे जननी एक्सप्रेस, 108 सेवा सिर्फ कागज़ों पर सुचारू हैं, जबकि वास्तविकता में मरीजों को बुनियादी मदद तक नहीं मिल पा रही।
महिला को ठेले पर अस्पताल लाने की तस्वीरें और वीडियो लोगों में भारी नाराज़गी का कारण बने हुए हैं।
इनका कहना है
डॉ. विनोद नायक, बीएमओ मेघनगर, ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“आपके माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। मेघनगर में एक जननी एक्सप्रेस और एक 108 एम्बुलेंस उपलब्ध है, जिनका संचालन एजेंसी द्वारा किया जाता है। आखिर मौके पर एम्बुलेंस क्यों नहीं पहुँची, इसकी जाँच करवाई जा रही है। प्रारंभिक स्तर पर एजेंसी की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। जो भी दोषी होगा — चाहे चालक, स्टाफ या एजेंसी — सभी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
