Kartikeya vs Rahul Gandhi: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी कानूनी लड़ाई ने अब नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा दायर मानहानि के मामले में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राहुल गांधी ने MP-MLA कोर्ट द्वारा जारी किए गए समन को चुनौती दी है, जिस पर अब उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी।
क्या है पूरा विवाद?
दरसअल, इस विवाद की जड़ें साल 2018 के विधानसभा चुनाव में छिपी हैं। झाबुआ में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कथित तौर पर पनामा पेपर्स मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके बेटे कार्तिकेय चौहान का नाम घसीटा था। हालांकि, बाद में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को लेकर दिए बयान पर स्पष्टीकरण दिया था, लेकिन कार्तिकेय को लेकर स्थिति साफ नहीं हुई थी। इसी को आधार बनाकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
सख्ती के बाद हाईकोर्ट का रुख
भोपाल की विशेष अदालत ने इस मामले में राहुल गांधी को बार-बार समन जारी किए हैं। कोर्ट ने तीसरी बार समन जारी करते हुए राहुल गांधी को 10 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए थे। लगातार दो बार पेश न होने के बाद यह तीसरी बार सख्त निर्देश थे, जिसके बाद आशंका जताई जा रही थी कि अदालत अब वारंट जारी कर सकती है। गिरफ्तारी या वारंट जैसी स्थिति से बचने के लिए राहुल गांधी की लीगल टीम ने हाईकोर्ट में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की बेंच के समक्ष याचिका दायर की है। इस मामले पर एक सप्ताह बाद सुनवाई होने की उम्मीद है।
गहराएगा सियासी घमासान
यह मामला केवल कानूनी नहीं रह गया है, बल्कि यह दो राजनीतिक घरानों के बीच की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। एक तरफ भाजपा इसे कांग्रेस की अनर्गल बयानबाजी का नतीजा बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे भाजपा की बदलापुर की राजनीति करार दे रही है। हाईकोर्ट के फैसले पर अब सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या राहुल गांधी को 10 अप्रैल की पेशी से राहत मिलेगी या उन्हें भोपाल कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।


