खबर डिजिटल न्यूज़ रिपोर्टर /कटनी— जिले में कुपोषण के खिलाफ अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू होगी। कलेक्टर आशीष तिवारी ने जिला पोषण समिति की समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि एक भी कुपोषित बच्चा चिन्हांकन से नहीं छूटना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जिन आंगनवाड़ी केंद्रों में सैम (SAM) और मैम (MAM) श्रेणी का एक भी बच्चा चिन्हित नहीं मिलेगा, वहां कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर मानदेय कटौती के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि चिन्हित सभी सैम और मैम बच्चों का मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम में शत-प्रतिशत पंजीयन कराया जाए तथा उपचार, पोषण परामर्श और नियमित फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कुपोषण की वास्तविक स्थिति छिपाने या लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
बैठक में आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण तक सीमित न रखकर बच्चों के मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास का प्रभावी केंद्र बनाने पर भी जोर दिया गया। 3 से 6 वर्ष तक के सभी बच्चों का शत-प्रतिशत पंजीयन और गुणवत्तापूर्ण शाला पूर्व शिक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने कहा कि आईसीडीएस की सभी योजनाओं का लाभ हर पात्र हितग्राही तक पहुंचे। पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में एक भी बेड खाली न रहे और भर्ती के बाद बच्चों की नियमित निगरानी की जाए, ताकि वे दोबारा कुपोषण का शिकार न हों।
समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। पात्र बालिकाओं का समग्र सत्यापन समय पर पूरा करने और सभी हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने वीएचएनडी दिवस को जन-जागरूकता का प्रभावी मंच बनाने, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण एवं स्वच्छता पर नियमित जागरूकता अभियान चलाने तथा प्रत्येक गतिविधि की पोषण ट्रैकर पर अनिवार्य प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक के अंत में कलेक्टर आशीष तिवारी ने दो टूक कहा कि “कुपोषण उन्मूलन का लक्ष्य केवल पोर्टल पर आंकड़े सुधारना नहीं, बल्कि बच्चों के वास्तविक स्वास्थ्य में सुधार लाना है।” उन्होंने बड़वारा, विजयराघवगढ़ और कटनी नगर परियोजना अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी को नियमित और सख्त मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
