खंडवा/ हरेंद्रनाथ ठाकुर/खबर डिजिटल/ मेहनत, लगन और संकल्प से अगर कुछ करने की ठान ली जाए, तो मंजिल कितनी भी ऊंची क्यों न हो, हासिल की जा सकती है। खंडवा में एडीएम के वाहन चालक रूप सिंह सोलंकी के घर खुशियों ने एक बार फिर दस्तक दी है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) परीक्षा 2023 का फाइनल रिजल्ट शनिवार को जारी हुआ, जिसमें रूप सिंह सोलंकी के छोटे बेटे ऋत्विक सोलंकी ने सफलता हासिल कर जनपद पंचायत सीईओ (CEO) के पद पर चयन प्राप्त किया है। यह उपलब्धि केवल उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे खंडवा जिले के लिए गर्व का क्षण है।
पिता का सपना, बेटों ने किया साकार
रूप सिंह सोलंकी पिछले कई वर्षों से खंडवा प्रशासन में वाहन चालक के रूप में कार्यरत हैं। कभी एडीएम की गाड़ी चलाना, तो कभी एसडीएम या डिप्टी कलेक्टर के साथ रहना, यह उनकी रोजमर्रा की जिम्मेदारी रही है। वे बताते हैं कि अधिकारियों के साथ काम करते हुए उनके मन में हमेशा एक सपना पलता था कि एक दिन उनके बेटे भी इसी कुर्सी पर बैठें, जिनकी गाड़ी वह चलाते हैं। उन्होंने यह प्रेरणा अपने बेटों को दी, और आज वही प्रेरणा हकीकत बन गई। सोलंकी के बड़े बेटे राहुल सोलंकी ने हाल ही में वन विभाग में रेंजर बनकर परिवार का मान बढ़ाया था। अब छोटे बेटे ऋत्विक सोलंकी ने एमपीपीएससी परीक्षा 2023 में बाजी मारकर अपने पिता की झोली में एक और सौगात डाल दी है।
IIT भाई की राह पर चला ऋत्विक
खंडवा के पंधाना स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय से 12वीं की पढ़ाई करने वाले ऋत्विक ने अपने बड़े भाई राहुल से प्रेरणा ली। राहुल का वर्ष 2018 में IIT मुंबई में चयन हुआ था। उसी राह पर चलते हुए ऋत्विक ने 2020 में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में प्रवेश लिया और पढ़ाई के साथ प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी शुरू कर दी। वर्ष 2022 में उन्होंने पहली बार एमपीपीएससी परीक्षा दी, जिसमें उनका चयन ट्रेजरी ऑफिसर के रूप में हुआ। जनवरी 2025 में उन्होंने अलीराजपुर जिले में इस पद पर जॉइन किया। लेकिन उनकी मंजिल यहीं नहीं रुकी। 2023 की परीक्षा में उन्होंने और ऊंची छलांग लगाई और जनपद सीईओ पद पर चयनित हुए। ऋत्विक कहते हैं, “मेरे पिता ने कभी अपनी सीमाओं को बाधा नहीं बनने दिया। उन्हीं को देखकर मैंने सीखा कि मेहनत और धैर्य से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।”
खंडवा की बेटी राजेश्वरी चौहान ने भी बढ़ाया मान
खंडवा जिले की अमलपुरा निवासी राजेश्वरी चौहान ने भी एमपीपीएससी 2023 परीक्षा में सफलता प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। किसान परिवार से आने वाली राजेश्वरी ने खंडवा में 12वीं तक पढ़ाई की और इसके बाद इंदौर में पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन किया। यह उनका दूसरा प्रयास था, जिसमें उन्होंने सफलता हासिल की। राजेश्वरी का कहना है कि उनके गांव में पुलिया न होने के कारण कई लड़कियों को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। उन्होंने कहा, “मैंने ठान लिया था कि जब मैं किसी जिम्मेदारी के पद पर रहूंगी, तो सबसे पहले अपने क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को दूर करूंगी। अब जनपद सीईओ के रूप में मेरा यही लक्ष्य रहेगा, लोगों की तकलीफों को कम करना।”
परिवार और जिले में जश्न का माहौल
शनिवार को परिणाम घोषित होते ही सोलंकी परिवार और चौहान परिवार में खुशियों की लहर दौड़ गई। रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों ने मिठाई बांटकर इन उपलब्धियों का जश्न मनाया। खंडवा प्रशासनिक परिवार के अधिकारी-कर्मचारी भी इस सफलता से बेहद खुश नजर आए। एडीएम काशीराम बडोले ने भी दोनों प्रतिभाओं को बधाई देते हुए कहा, “यह खंडवा के लिए गर्व का दिन है। रूप सिंह जैसे कर्मचारी हमारे लिए प्रेरणा हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को मेहनत और ईमानदारी की सीख दी है। वहीं राजेश्वरी जैसी बेटियां समाज में बदलाव की मिसाल हैं।”
सफलता की मिसाल बना खंडवा
रूप सिंह सोलंकी के परिवार की यह कहानी बताती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर मन में दृढ़ इच्छा हो तो सपने जरूर पूरे होते हैं। वहीं राजेश्वरी चौहान जैसी बेटियां यह साबित करती हैं कि ग्रामीण परिवेश में रहते हुए भी ऊंचे पद हासिल किए जा सकते हैं। एक साल में दो बार रूप सिंह सोलंकी के घर सफलता की घंटियां गूंजी है और अब खंडवा जिले के लोग गर्व से कह सकते हैं “खंडवा की मिट्टी में है मेहनत, और मेहनत से ही बनती है पहचान।”


