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Friday, April 17, 2026
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सवालों के घेरे में कानून-व्यवस्था: आदिवासियों के घर तांडव करने वाले रसूखदार आरोपी खुलेआम बाहर, पीड़ित दहशत में SP की चौखट पर; क्या खाकी पर भारी है ‘खादी’ का रौब?


सवालों के घेरे में कानून-व्यवस्था: आदिवासियों के घर तांडव करने वाले रसूखदार आरोपी खुलेआम बाहर, पीड़ित दहशत में SP की चौखट पर; क्या खाकी पर भारी है ‘खादी’ का रौब?
कटनी – मध्यप्रदेश में एक तरफ ‘सुशासन’ के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कटनी के कन्हवारा गांव की तस्वीरें व्यवस्था की पोल खोल रही हैं। आदिवासियों को जंगल में ले जाकर बेरहमी से पीटने वाले और गर्भवती महिला तक को न बख्शने वाले रसूखदार आरोपी भाजयुमो मंडल अध्यक्ष लखन साहू और उसके साथी पुलिस की पहुंच से अब भी दूर हैं। हालात यह हैं कि FIR दर्ज होने के बाद भी पीड़ित परिवार घर से निकलने में थर-थर कांप रहा है और इंसाफ के लिए एसपी की चौखट पर माथा टेकने को मजबूर है।

SP की जनसुनवाई में दिखा खौफ और जख्मों का मंजर
मंगलवार को एसपी कार्यालय की जनसुनवाई में जब पीड़ित सुखदेव कोल और गोरे लाल कोल पहुंचे, तो वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई। पीड़ितों ने अपने शरीर पर मौजूद बेल्टों और लात-घूंसों के गहरे निशान दिखाते हुए गुहार लगाई कि —”साहब, वे हमें जान से मार देंगे, हमें सुरक्षा दीजिए।”

खुलेआम चुनौती: पीड़ितों का आरोप है कि मामला दर्ज होने के बावजूद मुख्य आरोपी लखन साहू और उसके गुर्गे खुलेआम घूम रहे हैं। सवाल यह है कि क्या पुलिस जानबूझकर इन रसूखदारों को ‘पकड़ने’ की औपचारिकता निभा रही है या सत्ता का दबाव खाकी के हाथों की बेड़ियाँ बन गया है?

सत्ता की हनक और पुलिस की सुस्ती: 3 बड़े सवाल
इस पूरी घटना ने जिले की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है:

  • क्या गिरफ्तारी के लिए ‘मुहूर्त’ का इंतजार है? जब आरोपियों के नाम साफ हैं, मेडिकल रिपोर्ट में चोटों की पुष्टि हो चुकी है और SC-ST एक्ट जैसी गंभीर धाराएं लगी हैं, तो अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
  • शिकायत लीक होने पर चुप्पी क्यों? आदिवासियों ने वन विभाग से सिर्फ विनती की थी, लेकिन माफिया को लगा कि उन्होंने अवैध उत्खनन की पोल खोल दी है। विभाग के भीतर का वो कौन सा ‘विभीषण’ है जिसने माफियाओं तक खबर पहुंचाई? क्या पुलिस उस पर कार्रवाई करेगी?
  • लोकतंत्र या माफिया तंत्र? एक तरफ मुख्यमंत्री का दौरा और दूसरी तरफ सत्ताधारी दल के पदाधिकारी द्वारा आदिवासियों का अपहरण कर जंगल में तालिबानी सजा देना। क्या कटनी में कानून का राज खत्म होकर ‘माफिया राज’ शुरू हो गया है?

दहशत के साये में कन्हवारा
पीड़ितों के मुताबिक, आरोपी लगातार धमका रहे हैं कि शिकायत वापस नहीं ली तो अंजाम और भी बुरा होगा। घर में कैद मासूम बच्चे और घायल महिलाएं इस बात का सबूत हैं कि अपराधी बेखौफ हैं और पीड़ित लाचार। एएसपी डॉ. संतोष कुमार डेहरिया ने जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन तो दिया है, लेकिन कन्हवारा के आदिवासियों के लिए यह आश्वासन तब तक बेमानी है जब तक लखन साहू और उसके गुर्गे जेल की सलाखों के पीछे नहीं पहुंच जाते।

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