MP Nigam Mandal Update: मध्य प्रदेश की राजनीति में निगम-मंडल नियुक्तियों का इंतजार कर रहे दावेदारों को बड़ा झटका लगा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने फिलहाल इन नियुक्तियों पर रोक लगा दी है। यह चौंकाने वाला निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के साथ हुई चर्चा के बाद लिया गया है।
तैयार थी लिस्ट, फिर क्यों लगी रोक?
सूत्रों की मानें तो एक दर्जन से अधिक निगम-मंडलों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की सूची लगभग फाइनल हो चुकी थी। इस संबंध में मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच मैराथन बैठकें भी हो चुकी थीं। लेकिन अंतिम समय में संगठन ने ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाते हुए पूरी प्रक्रिया को होल्ड पर डाल दिया है।
रोक के पीछे के 3 कारण
पहला कारण: सूत्रों के अनुसार संगठन ने नई रणनीति तैयार की है। जिसके तहत सबसे पहले कॉलेजों और अन्य संस्थानों की जनभागीदारी समितियों में नियुक्तियां की जाएंगी। पार्टी का मानना है कि जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को पहले इन समितियों में जिम्मेदारी दी जाएगी।
दूसरा कारण: भाजपा नेतृत्व फिलहाल किसी भी तरह की जल्दबाजी के मूड में नहीं है। आगामी पांच राज्यों के चुनावी नतीजों और वहां की राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही मध्य प्रदेश में मलाईदार पदों का बंटवारा किया जाएगा।
तीसरा कारण: नियुक्तियों की सूची बाहर आते ही पार्टी के अंदर असंतोष पनपने का डर रहता है। समन्वय और संतुलन बनाए रखने के लिए नेतृत्व ने फिलहाल ‘स्टॉप’ का बटन दबाया है ताकि सभी गुटों को साधने के लिए और वक्त मिल सके।
क्या नियुक्तियां रद्द हो गई हैं?
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह रोक अस्थायी है। नियुक्तियां रद्द नहीं हुई हैं, बल्कि उन्हें पारदर्शी और रणनीतिक बनाने के लिए टाला गया है। चुनाव परिणामों के बाद एक नई और संशोधित सूची सामने आने की संभावना है, जिसमें क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का और बेहतर तालमेल देखने को मिल सकता है।


