MP Rajya Sabha Elections: भारतीय जनता पार्टी अपना 47वां स्थापना दिवस मना रही है। पूरे प्रदेश में जश्न का माहौल है और संगठन अपनी मजबूती का दावा कर रहा है। लेकिन बीजेपी के इस उत्सव के बीच एक ऐसा कड़वा सच भी उभर कर आया है, जिसने भाजपा के अंदर और बाहर एक नई बहस छेड़ दी है। 47 साल पहले जिस भाजपा की स्थापना में सामान्य वर्ग के नेताओं ने खून-पसीना एक किया था, आज मध्य प्रदेश से राज्यसभा में उसी वर्ग का प्रतिनिधित्व ‘शून्य’ है।
MP राज्यसभा समीकरण
दरसअल, मध्य प्रदेश से वर्तमान में भाजपा के 8 राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से एक भी सदस्य सामान्य वर्ग से नहीं है। SC वर्ग से 4 सांसद है, जिनमें एल. मुरुगन, उमेशनाथ महाराज, जार्ज कुरियन और सुमित्रा वाल्मीकि है। OBC वर्ग से 3 सांसद है, जिनमें बंसीलाल गुर्जर, कविता पाटीदार और माया नरोलिया है। ST वर्ग से 1 सांसद सुमेर सिंह सोलंकी है। वही विपक्ष की बात करे तो कांग्रेस के 3 राज्यसभा सांसदों में से 2 सामान्य वर्ग और 1 ओबीसी वर्ग से हैं।
सवर्णों को साइडलाइन क्यों?
भाजपा ने अपने 8 सांसदों में 3 महिलाओं को जगह देकर 33 फीसदी महिला आरक्षण का संतुलन तो साधा, लेकिन सवर्ण नेताओं को जगह नहीं मिल पाई। राजनीतिक जानकारों की माने तो भाजपा का कोर वोटर आज भी सामान्य वर्ग ही है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी अन्य वर्गों को साधने के लिए सवर्णो को किनारे करती नजर आ रही है।
डैमेज कंट्रोल की तैयारी
अंदरखाने से मिल रही खबरों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व को अब सवर्णों की नाराजगी का अहसास होने लगा है। सूत्रों का दावा है कि आने वाले समय में डैमेज कंट्रोल के लिए पार्टी दो सामान्य वर्ग के नेताओं को मौका दे सकती है। इसमें एक ब्राह्मण और एक क्षत्रिय वर्ग के चेहरे को बड़ी जिम्मेदारी या राज्यसभा में भेजने की तैयारी चल रही है।


