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महुआ तेल निकालने से बदली किस्मत… गांव को मिला रोजगार और पहचान.. मिसाल पेश

कट्ठीवाड़ा के पवन गुप्ता बने आत्मनिर्भरता की मिसाल

आलीराजपुर/कुलदीप खराड़ीया/खबर डिजिटल/ अगर हौसले मजबूत हों और सही समय पर सही योजना का साथ मिल जाए, तो गांव की सीमाओं से निकलकर सफलता की नई कहानी लिखी जा सकती है। आलीराजपुर जिले के ग्राम कट्ठीवाड़ा निवासी पवन अशोक गुप्ता ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। कभी छोटी-सी किराना दुकान से सीमित आमदनी करने वाले पवन गुप्ता आज महुआ (डोली) कच्ची घानी तेल के सफल उद्यमी बन चुके हैं और आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीन पर उतार रहे हैं।

सरकारी योजना बनी बदलाव की चाबी
वर्ष 2024–25 में उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क के दौरान पवन गुप्ता को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) की जानकारी मिली। योजना की संभावनाओं को समझकर उन्होंने परंपरागत महुआ को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का निर्णय लिया और कच्ची घानी तेल यूनिट स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

5.43 लाख की परियोजना, आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव
इस उद्यम पर कुल 5.43 लाख रुपये की लागत आई। 1.89 लाख रुपये का अनुदान PMFME योजना से मिला। 3.39 लाख रुपये का ऋण बैंक ऑफ बड़ौदा, कट्ठीवाड़ा शाखा से स्वीकृत हुआ। नई कोल्ड प्रेस मशीनरी लगने के बाद उच्च गुणवत्ता वाला महुआ तेल उत्पादन शुरू हुआ, जिसने बाज़ार में जल्दी ही अपनी अलग पहचान बना ली।

12 हजार किलो उत्पादन, हर सीजन 1.50 लाख की शुद्ध आय
आज पवन गुप्ता की यूनिट की उत्पादन क्षमता बढ़कर लगभग 12,000 किलोग्राम प्रति सीजन हो चुकी है। आधुनिक तकनीक से तैयार तेल की मांग स्थानीय बाजार में लगातार बढ़ रही है। जहां पहले किराना दुकान से सीमित आमदनी होती थी, वहीं अब महुआ तेल व्यवसाय से उन्हें करीब 1.50 लाख रुपये प्रति सीजन शुद्ध लाभ मिल रहा है।

सिर्फ कमाई नहीं, रोजगार भी दिया
पवन गुप्ता का यह उद्यम सिर्फ उनकी आय तक सीमित नहीं है। 2 पुरुष और 1 महिला को नियमित रोजगार मिल रहा है। आसपास के ग्रामीणों से महुआ (डोली) की खरीदकर उचित मूल्य दिया जा रहा है। इससे न सिर्फ स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ी है, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

सम्मान बढ़ा, गांव में बनी पहचान
पवन गुप्ता कहते हैं कि इस उद्यम ने उनकी आर्थिक स्थिति के साथ-साथ सामाजिक सम्मान भी बढ़ाया है। वे अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को देते हुए कहते हैं कि PMFME योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का वास्तविक अवसर दिया।

ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा
कट्ठीवाड़ा के पवन गुप्ता की कहानी उन युवाओं और छोटे व्यापारियों के लिए मिसाल है, जो संसाधनों के अभाव में सपनों को छोड़ देते हैं। यह सफलता संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग , मेहनत और सोच में बदलाव से गांव में रहकर भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।

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