खबर Digital News रिपोर्टर कटनी-– जिले के बहुचर्चित मेसर्स के.पी. अवस्थी खनिज चोरी प्रकरण में ₹7.31 करोड़ से अधिक की रिकवरी की प्रक्रिया के बीच खनिज विभाग की हालिया कार्रवाई नए विवाद में घिर गई है। मौके पर पहुंचे विभागीय अमले की जांच को लेकर ऐसे सवाल उठ रहे हैं, जिन्होंने पूरी कार्रवाई की पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है।जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को खनिज विभाग की टीम संबंधित क्षेत्र में निरीक्षण के लिए पहुंची। विभाग का कहना है कि यह नियमित जांच का हिस्सा था और इसका रिकवरी प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। हालांकि स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि निरीक्षण का उद्देश्य आरोपी पक्ष की परिसंपत्तियों का आकलन करना था।सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि निरीक्षण के दौरान कथित रूप से लंबे समय से बंद पड़े प्लांट का ड्रोन सर्वे और पंचनामा तैयार किया गया, जबकि जिन खदानों और प्लांटों के वर्तमान में संचालित होने का दावा किया जा रहा है, उनके निरीक्षण को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।इसी वजह से अब यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि संचालित परिसंपत्तियों का समुचित आकलन नहीं किया गया, तो क्या रिकवरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है? क्या वास्तविक स्थिति का पूरा दस्तावेजीकरण हुआ है? इन सवालों के जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं।गौरतलब है कि यह मामला वर्षों से लंबित रहा है और अब उच्च स्तर पर कार्रवाई तेज होने के बाद विभागीय हर कदम पर निगाहें टिकी हुई हैं। ऐसे में जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल प्रशासन के लिए भी चुनौती बनते दिख रहे हैं।उधर, खनिज विभाग ने किसी भी तरह की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई से इनकार किया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि निरीक्षण पूरी तरह नियमित प्रक्रिया के तहत किया गया और परीक्षण की कार्रवाई जारी है।अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच की अंतिम रिपोर्ट क्या तस्वीर पेश करती है और क्या प्रशासन इन उठते सवालों का स्पष्ट जवाब देकर पूरे मामले से पर्दा उठा पाएगा।
कटनी से सौरभ श्रीवास्तव की रिपोर्ट मो. 9131308097
