Kailash Vijayvargiya: मध्य प्रदेश सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय कानूनी पचड़े में फंसते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस ने उनके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्य चुनाव आयोग में एक शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि विजयवर्गीय ने विधानसभा चुनाव के दौरान जमा किए गए अपने शपथ पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई है, जिसे आधार बनाकर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है।
रतलाम बयान बना गले की फांस
कांग्रेस की शिकायत की जड़ में विजयवर्गीय का वह बयान है, जो उन्होंने हाल ही में रतलाम के एक कार्यक्रम में दिया था। कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने शिकायत में कहा है कि मंत्री विजयवर्गीय ने सार्वजनिक मंच से स्वीकार किया था कि पश्चिम बंगाल में उनके खिलाफ 34 से 38 फर्जी मामले दर्ज हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि वे बंगाल जाते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और अन्य प्रवक्ताओं का कहना है कि जब मंत्री स्वयं बंगाल में दर्ज दर्जनों मुकदमों की बात स्वीकार कर रहे हैं, तो उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में इन जानकारियों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया? नियमों के मुताबिक, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को अपने ऊपर दर्ज सभी मुकदमों का ब्यौरा देना अनिवार्य है। जानकारी छिपाना रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट का उल्लंघन है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की है कि विजयवर्गीय के हलफनामे की जांच की जाए और यदि सही पाए जाते हैं, तो उनकी विधानसभा सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।
क्या जा सकती है कुर्सी?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, यदि चुनाव आयोग को लगता है कि शपथ पत्र में जानबूझकर जानकारी छिपाई गई है, तो यह मामला कोर्ट तक जा सकता है। फिलहाल, इस शिकायत ने प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। भाजपा की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में यह मुद्दा गरमा सकता है।


