Mohan Cabinet Expansion: मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार और निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच हुई बंद कमरे की बैठक ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। सूत्रों की मानें तो भाजपा अब राज्यसभा चुनाव के नतीजों का इंतजार कर रही है, जिसके तुरंत बाद सरकार और संगठन में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
शिवराज के चहेतों को सरकार में एंट्री
अंदरखाने की खबर है कि इस बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने अपने चहेते विधायकों को मंत्रिमंडल व निगम-मंडलों में जिम्मेदारी देने की पैरवी की है। दिग्गज नेता गोपाल भार्गव और भूपेंद्र सिंह को फिर से कैबिनेट में शामिल किए जाने की चर्चा है। इसके अलावा भोपाल से विधायक रामेश्वर शर्मा का नाम भी मंत्री पद के लिए मजबूती से उभरा है। इसके अलावा विदिशा विधायक मुकेश टंडन, कुरवाई विधायक हरि सिंह सप्रे, पूर्व मंत्री कमल पटेल और बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव को बड़े निगम-मंडलों की कमान सौंपी जा सकती है।
गिर सकती है इन मंत्रियों पर गाज?
विस्तार के साथ-साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी होने के भी संकेत मिल रहे हैं। ‘मछली कांड’ में आरोपियों के साथ तस्वीरें वायरल होने के बाद विवादों में घिरे सारंग पर गाज गिर सकती है। वही मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी के मामले में कानूनी उलझनों के चलते उनकी कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है।
नरोत्तम और रावत का ‘वेटिंग गेम’
आगामी फेरबदल में दतिया और विजयपुर के समीकरण भी अहम मामने जाने लगे है। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का मामला अदालत में है। यदि फैसला उनके खिलाफ आता है और उपचुनाव होते हैं, तो नरोत्तम मिश्रा की सरकार में वापसी का रास्ता साफ हो सकता है। वही विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के मामले में भी कोर्ट के फैसले का इंतजार है। यदि स्थितियां बदलती हैं, तो रामनिवास रावत को फिर से मंत्री बनाया जा सकता है।
राज्यसभा चुनाव है ‘डेडलाइन’
भाजपा आलाकमान फिलहाल राज्यसभा चुनाव की प्रक्रियाओं में व्यस्त है। माना जा रहा है कि इस महीने के अंत तक या अगले महीने की शुरुआत में मंत्रिमंडल विस्तार की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। हालांकि संगठन की ओर से अभी कोई औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन नेताओं की बार-बार हो रही बैठकों ने साफ कर दिया है कि मोहन कैबिनेट का स्वरूप जल्द ही बदलने वाला है। सरकार में कुछ तो बड़ा होने वाला है। फिलहाल सूत्रों के अनुसार बीजेपी राज्यसभा चुनाव का इंतजार कर रही है।
मोहन-शिव-मेहंत एक क्यों?
राजनीतिक जानकारों का तर्क है कि प्रदेश बीजेपी में इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रहा है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडलेवाल नेताओं को कई बार समन्वय की नसीहत भी दे चुके है। इसके अलावा बीजेपी के कई दिग्गज विधायक, जो सरकार में कई बार मंत्री रहे, वे अंधरूनी तौर पर मंत्री पद नहीं मिलने के चलते समय समय पर नाराज दिखाई देते है। प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव और 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी नेताओं को एकजुट करने की जुगत में है। बीजेपी नही चाहती की पार्टी के अंदर नेताओं की अंधरूनी नाराजगी का असर चुनाव पर पड़े। इसी के चलते मोहन शिवराज और हेमंत के बीच मुलाकात होना माना जा रहा है।


