डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी जिले में धर्मांतरण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। कमको मोहनिया ग्राम पंचायत के दिवारी गांव से दर्जनों आदिवासी ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर और डिंडौरी पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी। ग्रामीणों का आरोप है कि ईसाई मिशनरियां गांव-गांव छोटी-छोटी सभाएं कर भोले-भाले आदिवासियों को बहला-फुसलाकर धर्म बदलवा रही हैं।

कलेक्टर-एसपी से आदिवासियों ने की शिकायत
शिकायत लेकर पहुंचे गांव के बुजुर्ग बुद्ध सिंह मरावी ने बताया कि दिवारी और आसपास के इलाकों में लगभग 80 प्रतिशत आदिवासी परिवार सनातन परंपरा छोड़कर ईसाई धर्म अपना चुके हैं। इससे गांव की सामाजिक रीति-रिवाज पूरी तरह बदल गई है। बुद्ध सिंह मरावी कहते हैं, पहले हमारे यहां शादी-ब्याह, दशगात्र और अंतिम संस्कार अपने रीति-रिवाज से होते थे। अब सब कुछ बदला-बदला सा लगता है। हमारे त्योहार, हमारी पूजा पद्धति, हमारे संस्कार पीछे छूटते जा रहे हैं।

एक दशक से जारी है धर्मांतरण का सिलसिला
ग्रामीणों का कहना है कि जिले में धर्मांतरण की शिकायतें करीब 10 साल से लगातार सामने आ रही हैं। इसके बाद भी इस पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। जो परिवार आज भी अपने पुरखों की परंपरा से जुड़े हैं, वे लगातार समाज के दूसरे लोगों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि कुछ लोग थोड़े से लालच में आकर अपनी मूल पहचान छोड़ रहे हैं।
दिवारी गांव के युवाओं ने कलेक्टर और एसपी से मांग की है कि इस मामले में ठोस कदम उठाए जाएं। युवाओं का कहना है कि समाज के ही कुछ लोग ईसाई मिशनरियों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि गांव की एकता और परंपरा बनी रहे।
इस मामले में अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद डिंडोरी के जिला अध्यक्ष जितेंद्र विश्वकर्मा ने भी बयान दिया है।
उन्होंने कहा, “मिशनरियां मजबूर और सीधे-सादे आदिवासियों को आर्थिक मदद का लालच देकर अपने जाल में फंसा रही हैं। दिवारी गांव के लोग जब हमारे पास आए तो हमने उन्हें भरोसा दिलाया है कि जो लोग भटक गए हैं, उनकी घर वापसी के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। परिषद समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार काम कर रही है।”
ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईसाई मिशनरियों के द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण को कैसे रोका जाए। आरोप है कि व्यक्तिगत लाभ और छोटी-मोटी सुविधाओं के नाम पर भोले-भाले आदिवासियों को अपने मूल धर्म से अलग किया जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग आज भी इस जाल में फंस रहे हैं।
फिलहाल जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन के बाद ग्रामीणों को कार्रवाई का इंतजार है। गांव के लोग चाहते हैं कि उनकी संस्कृति, उनके संस्कार और उनकी पहचान सुरक्षित रहे।


