मध्यप्रदेश में जल्द ही कैबिनेट विस्तार को लेकर हलचल तेज होने वाली है. माना जा रहा है कि मॉनसून से पहले सरकार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कई नए चेहरों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाले कुछ मंत्रियों की छुट्टी तय मानी जा रही है. इसी को लेकर सरकार और भाजपा संगठन ने मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा शुरू कर दी है. राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कई मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, जबकि कुछ मंत्रियों के काम की खुलकर सराहना की गई.
मोहन यादव ने क्या कहा
बैठक के दौरान जिन मंत्रियों ने अपने विभागों में बेहतर काम किया, उन्हें मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और संगठन की ओर से प्रशंसा मिली. स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के काम को काफी सराहा गया. खासतौर पर पीपीपी मॉडल के जरिए नए मेडिकल कॉलेज शुरू करने की पहल को सकारात्मक कदम माना गया. निवेश को बढ़ावा देने के लिए मंत्री चेतन कश्यप की भी तारीफ हुई. वहीं प्रदेश में सड़क नेटवर्क मजबूत करने को लेकर मंत्री राकेश सिंह के कार्यों को सराहा गया, हालांकि 90 डिग्री ब्रिज का मुद्दा भी चर्चा में रहा.
मंत्री प्रहलाद पटेल का रिपोर्ट कार्ड
पंचायत सशक्तिकरण और पेसा एक्ट को जमीनी स्तर पर लागू करने में मंत्री प्रहलाद पटेल के प्रयासों की भी सराहना की गई. शिक्षा विभाग में बेहतर परीक्षा परिणामों को लेकर मंत्री राव उदय प्रताप सिंह की तारीफ हुई. वहीं संगठनात्मक गतिविधियों और विभागीय कार्यों में सक्रियता दिखाने पर धर्मेंद्र लोधी को भी सराहना मिली.
दूसरी तरफ कई मंत्री संगठन और सरकार की नाराजगी का सामना करते नजर आए. विवादित बयानों को लेकर मंत्री विजय शाह को कड़ी फटकार लगी. कर्नल सोफिया पर दिए गए बयान के कारण पार्टी की छवि खराब होने पर हाईकमान नाराज बताया जा रहा है. मंत्री प्रतिमा बागरी भी विवादों में रहीं. उनके भाई का नाम गांजा तस्करी मामले में आने और अपने जिले की स्थिति संभालने में कमजोरी को लेकर संगठन ने नाराजगी जताई.
नागर सिंह चौहान का रिपोर्ट कमजोर
नागर सिंह चौहान के खिलाफ क्षेत्र में अवैध शराब कारोबार और जनता की नाराजगी की शिकायतों ने भी उनका रिपोर्ट कार्ड कमजोर कर दिया. जल जीवन मिशन की धीमी प्रगति को लेकर मंत्री संपतिया उइके से भी जवाब मांगा गया. खाद-बीज संकट, किसानों की परेशानी और अवैध रेत खनन के मामलों को लेकर मंत्री एदल सिंह कंसाना को भी फटकार मिली. गेहूं खरीदी व्यवस्था में अव्यवस्था और मंडियों में किसानों की परेशानियों को लेकर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की कार्यशैली पर सवाल उठे. वहीं संगठन से नाराज होकर इस्तीफे की बात कहने वाले नारायण सिंह पंवार को भी सख्त संदेश दिया गया.
