भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मोहन सरकार को दो साल पूरे हो चुके हैं, सरकार ने दो सालों में क्या किया, इसका रिपोर्ट कार्ड पहली बार प्रत्येक मंत्री ने विभागवार जनता के सामने रखा। ये पहली बार था कि जनता जान रही थी कि प्रदेश की सरकार के मंत्री उनके लिए क्या कुछ कर रहे हैं, लेकिन इसी बीच कई मंत्रियों की छवि को लेकर भी चर्चाओं बाजार गर्म दिखाई दिया, जिन्होंने पिछले दो सालों के भीतर मोहन सरकार की सुनहरी तस्वीर को धूंधला करने का काम किया, इसीलिये अंदरखानों में सुगबुगाहट है कि अब जल्द ही ऐसे मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा, जिन्होंने सरकार के सफेद कुर्ते को दागदार करने का काम किया।
इस आधार पर होगा मंत्रिमंडल विस्तार
मुख्यमंत्री ने सरकार के दो साल पूरे होने पर कहा था कि मंत्रियों के काम का रिव्यू होगा। उन्होंने कहा था कि दो साल पूरे होने पर सभी मंत्रियों के परफॉर्मेंस की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने बताया था कि कुछ मंत्री नए हैं, जबकि कुछ अनुभवी हैं, इसलिए समीक्षा जरूरी है ताकि काम में सुधार हो सके। जब उनसे पूछा गया कि क्या जिनका काम अच्छा नहीं होगा, उन्हें हटाया जा सकता है, तो उन्होंने कहा था कि पहले रिपोर्ट तैयार हो जाने दीजिए, फिर इस पर बात करेंगे। हालांकि इसके बाद उन्होंने पार्टी आलाकमान से चर्चा के बाद निर्णय लेने की बात कहकर थोड़ा विलंब होने के संकेत दिए थे, जोकि अब पूरा होने की ओर दिखाई दे रहे हैं।
एमपी में लागू हो सकता है ‘गुजरात फॉर्मूला’
आपको याद होगा कि किस तरह से गुजरात में सारे मंत्रियों से इस्तीफा दिलाकर फिर से नए मंत्रिमंडल का गठन किया गया था, अंदरखानों से यह बात भी छनकर आ रही है कि आने वाले वक्त में गुजरात फॉर्मूले पर भी एमपी की मोहन सरकार चल सकती है। जिसके तहत दरकिनार किए गए कई वरिष्ठ विधायकों को फिर से मंत्री बनने का मौका मिल सकता है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों को अन्य जिम्मेदारी से नवाजा जा सकता है, जिनमें निगम मंडल की जिम्मेदारी शामिल है। साथ ही दिल्ली में जगह देने की भी बात निकलकर सामने आ रही है।
जातिगत समीकरणों का भी रखा जाएगा ख्याल
वर्तमान में मोहन मंत्रिमंडल में खुद सीएम समेत कुल मिलाकर 31 मंत्री है, चार की जगह खाली है। जातीय समीकरण के मुताबिक मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री ओबीसी समुदाय से आते हैं, जो राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका रखता है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल सहित नौ मंत्री सवर्ण वर्ग से हैं, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से पांच-पांच मंत्री शामिल हैं। इस लिहाज से दो वरिष्ठ पूर्व मंत्रियों को जगह देकर उपकृत किया जा सकता है, तो वहीं कांग्रेस से बीजेपी में आने वाले एक विधायक को मंत्री का दर्जा मिल सकता है, साथ ही समीकरण के अनुसार एक विधायक का प्रमोशन हो सकता है।
रेड जोन में मोहन मंत्रिमंडल के ये मंत्री
मंत्री विजय शाह – कर्नल सोफिया कुरैशी पर बयान देने के बाद से ही मंत्री विजय शाह पर तलवार लटकी है, साथ ही उन्होंने लाड़ली बहनों को लेकर भी बयान देकर मुश्किल मोल ले ली थी, उन्होंने कहा था कि सरकार लाड़ली बहनों को हर महीने 15 सौ रुपए दे रही है। ये उनका दायित्व है कि वे उनका सम्मान करने आएं। भरी बैठक में उन्होंने कहा था कि जो लाड़ली बहने सम्मान के लिए नहीं आएंगी, उनके प्रकरण जांच में अटका दिए जाएंगे, जिसके बाद से उनके मंत्री पद को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय – हालिया दौर में सबसे ज्यादा जिस मुद्दे की चर्चा है, वो है इंदौर भागीरथपुरा जल कांड। इसके सामने आने के बाद से मंत्रिमंडल के कद्दावर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय निशाने पर थे। इस आग में घी डालने का काम उनके पत्रकार को घंटा कहे जाने वाले बयान ने किया। देशभर में इस पर चर्चा शुरु हो गई, वहीं अब हवाओं में उनके मंत्रिमंडल से बाहर होने की खबरें भी वायरल है, लेकिन इसकी संभावना उनके अनुभव को देखते हुए कम ही नजर आ रही है।
मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा – इन मंत्री ने अपनी ही सरकार की किरकिरी कराते हुए कह दिया था कि पहले की सब सरकारों के काम बेकार थे, मोहन यादव सरकार सारे कामों को ठीक कर रही है। बाद में उन्हेोंने डेमेज कंट्रोल करते हुए साल 2003 के पहले की सरकार का जिक्र कर दिया। वहीं बीच में एक जिले के दौरे के दौरान भी उनका घेराव कर नाराजगी जाहिर की गई थी। तभी से उनके पद को लेकर निगेटिव संकेत मिलते नजर आ रहे हैं।
मंत्री धर्मेद्र सिंह लोधी – मंत्री धर्मेंद सिंह लोधी ने बिहार के एन चुनाव के समय शराबबंदी को लेकर अजीब बयान दिया था, उन्होंने कहा था कि बिहार चुनाव प्रचार में अभी मैंने पता किया बहुत सारे लोग गए थे। मैंने उनसे पता किया कि तो उन्होंने बताया कि शराबंबदी तो हो गई है, लेकिन शराब माफिया घर-घर शराब पहुंचाने में लगे हैं. फोन करो, घर पर शराब आ जाती है, ये जबरदस्ती बंद नहीं होगी। जिसके बाद पार्टी ने उन्हें तलब कर फटकार लगाई थी।
मंत्री प्रतिमा बागरी – कुछ दिनों पहले ये महिला मंत्री अपने परिवार के कामों को लेकर सवालों के घेरे में थी, पहले जीजा के गांजा तस्करी में गिरफ्तार होने के कारण पूरी सरकार को कटघरे में खड़ा किया गया था। फिर अपने भाई के गांजा तस्करी में पकड़ाने के कारण कटघरे में खड़ी हो गई थीं। जिनके मंत्री पद को लेकर भी कयासबाजी जारी है।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत – बुंदेलखंड में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पूर्व गृहमंत्री व खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह के बीच आपसी खींचतान खुलेआम जारी थी। पार्टी ने दोनों के बीच सुलह कराने के लिए लंच पॉलिटिक्स का सहारा लिया था। जबकि उनके इलाके से ही पू्र्व मंत्री गोपाल भार्गव को अबकी बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, साथ ही भूपेंद्र सिंह जैसे कद्दावर भी मंत्री पद से हाथ धो बैठे। ऐसे में बैलेंस बनाने के लिए मंत्री गोविंद सिंह राजपूत का पद खतरे में नजर आ रहा है।
मंत्री लखन पटेल – दमोह जिले की हटा विधानसभा से BJP विधायक उमादेवी खटीक ने एक कार्यक्रम के दौरान प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार के सामने कहा था कि उनकी विधानसभा में दो-दो मंत्री हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिसके पीछे उनका इशारा जिले की दो विधानसभा जबेरा विधानसभा से दूसरी बार विधायक बने धर्मेंद्र सिंह लोधी और पथरिया विधानसभा से दूसरी बार विधायक बने लखन पटेल की तरफ था, ऐसे में अपने बयान के कारण घिरे धर्मेंद्र सिंह लोधी के साथ लखन पटेल को भी मंत्री पद से हाथ धोना पड़ सकता है।


