भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ सीएम डॉ. मोहन यादव की सरकार को दो वर्ष पूरे होने वाले हैं, इसमें कई उतार-चढ़ाव का उन्होंने सामना किया। उच्च शिक्षा मंत्री से सीधे मुख्यमंत्री का पद मिलने के बाद सीएम डॉ. यादव ने समय-समय पर अपने- आप को साबित करने का काम किया। चाहे वो लाड़ली बहनों की राशि बढ़ाए जाने की बात हो, या फिर प्रदेश में ड्रग जिहाद, सिरप कांड जैसे मुद्दों का गरमाना। हर बार उन्होंने अपनी कार्यक्षमता का परिचय दिया, और बिना किसी झिझक के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की। इसी तरह से पिछले 5 महीने पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभालने वाले हेमंत खंडेलवाल ने भी अपनी कार्यकुशलता को साबित कर दिया, और पिछले प्रदेश अध्यक्षों के मुकाबले सबसे पहले अपनी टीम के दर्शन लोगों को करा दिए, वहीं अब दोनों ही नेताओं की जुगलबंदी की झलक साफ दिखाई देने लगी है, चाहे वो सत्ता हो या फिर संगठन।
मंत्रियों के परफॉर्मेंस की समीक्षा
विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव अपने मंत्रियों के विभागों की समीक्षा कर रहे हैं, उनका पिछले दो साल में किस तरह का परफॉर्मेंस रहा, इस पर बात की जा रही है। दो दिन समीक्षा बैठक भोपाल और दो दिन खजुराहो में होगी। 2 नवंबर मंगलवार और 3 नवंबर बुधवार को समीक्षा का कार्यक्रम तय किया गया, इसके साथ ही आगामी 8-9 नवंबर को खजुराहो में बचे विभाग की समीक्षा की जाएगी। साथ ही मंगलवार के दिन ही कैबिनेट की बैठक होगी, जिसमें विभागवार आने वाले तीन सालों का प्लान मांगा जाएगा। ये अपनेआप में मुख्यमंत्री का एक खास कदम है, क्योंकि इसे ही जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही सरकार माना जाता है, ताकि प्रत्येक विभाग का लाभ जनता तक पहुंचे, जिसको आगे बढ़ाने की कवायद जारी है।
बीजेपी दफ्तर में बैठ रहे मंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस की नीति के समान ही बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सत्ता को संगठन का रास्ता दिखाने का काम किया। उन्होंने तय किया कि बीजेपी दफ्तर में रोजाना दो मंत्री बैठेंगे और कार्यकर्ताओं समेत आम जनता की समस्याओं को सुनेंगे। ये भी अपनेआप में एक अनूठा कदम माना जा रहा है, क्योंकि मोहन सरकार में कई वरिष्ठ मंत्री हैं, जिन्हें बीजेपी दफ्तर से कार्यकर्ताओं को बात सुनने से लिए बैठाना, संगठनात्मक गतिविधि का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं अभी तक फिलहाल जिन मंत्रियों के बैठने की जानकारी साझा की गई है उनमें मंत्री जगदीश देवड़ा, गौतम टेटवाल, राकेश सिंह, दिलीप अहिरवार, विश्वास सारंग, लखन पटेल, कैलाश विजयवर्गीय, प्रतिमा बागरी, विजय शाह, नरेंद्र शिवाजी पटेल का नाम शामिल है, इसके आगे की सूची भी आने वाले वक्त में साझा की जाएगी।
सरकार के केंद्र में मंत्री
काफी समय से कयासबाजी चल रही है कि सीएम डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जा सकता है, मंत्रियों के परफॉर्मेंस को जांचने, पार्टी के कार्यकर्ताओं से उनका फीडबैक लेने, जैसे बिंदु इन अटकलों के बीच काफी कुछ भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि फिलहाल में भी मोहन सरकार में चार मंत्री के पद खाली है, और कई विधायक कतार में है कि उन्हें मंत्री बनाया जाए, ऐसे में इन बैठकों और कवायदों का रंग मोहन-हेमंत के जोड़ी के नए बसंत के रुप में दिखाई दे सकता है।
अन्य नियुक्तियों पर भी चर्चा जारी
एमपी की बीजेपी सरकार के बनने के बाद से और पिछले विधानसभा चुनाव में अन्य दलों के कई बड़े नेताओं को शामिल करने के बाद से निगम-मंडल, बोर्ड, एल्डरमैन और जनभागीदारी समितियों के अध्यक्षों के नामों के ऐलान का पार्टी के नेताओं को इंतजार है, क्योंकि पहले कहा जा रहा था कि यह सब बिहार चुनाव के बाद होगा, जहां पर भाजपा की प्रचंड जीत हुई, जिसके इनाम के रुप में बीजेपी के कई नेता मलाईदार पदों की आस में है, हालांकि मोहन-हेमंत क्या निर्णय लेते हैं, ये कहना मुश्किल है।


