Wednesday, November 4, 2026
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MP News: लापरवाही पड़ी भारी, एमपी में अफसरों-अधिकारियों पर सस्पेंशन की बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश के देवास जिले में प्रशासन ने लापरवाही के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर Rituraj Singh ने जनसुनवाई के दौरान मिली शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए दो पटवारियों समेत तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। इसके अलावा अन्य अधिकारियों पर भी सख्त कदम उठाए गए हैं, जिससे यह साफ संदेश गया है कि काम में ढिलाई बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

दरअसल, शुक्रवार को जिले के पीपरी गांव में विकासखंड स्तर की जनसुनवाई आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। लोगों ने जमीन, बिजली, पानी और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़ी शिकायतें सीधे कलेक्टर के सामने रखीं। कलेक्टर ने मौके पर ही कई मामलों का समाधान कराया, लेकिन इसी दौरान कुछ अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई।

लापरवाही पर सख्त कार्रवाई

जनसुनवाई के दौरान सामने आई गड़बड़ियों को देखते हुए कलेक्टर ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। पीएचई विभाग की सब इंजीनियर वैष्णवी भावसार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं, फौती नामांतरण के मामलों में देरी करने परपटवारी सूरज गंगवाल और नवनीत पुरंदरे को भी सस्पेंड कर दिया गया।

इसके अलावा बिजली विभाग के कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हुई। टूटे हुए बिजली पोल को समय पर ठीक न करने पर जेई डीएस परिहार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। वहीं, लाइनमैन कृष्णकांत बघेल की 15 दिन की सैलरी काटने के निर्देश दिए गए हैं। इन कार्रवाइयों से प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

जनसुनवाई में मिला त्वरित समाधान

जनसुनवाई कार्यक्रम में कलेक्टर के साथ जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बागली के विधायक मुरली भंवरा भी इस दौरान उपस्थित रहे। अधिकारियों की मौजूदगी में लोगों की समस्याएं सुनी गईं और कई मामलों में तुरंत राहत दी गई।

कलेक्टर ने बिजली करंट से झुलसे शिवराम बघेल और चैन सिंह को 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इसके साथ ही, बारिश के कारण घर गिरने से प्रभावित नानसिंह कन्नौज को भी 25 हजार रुपये की मदद दी गई।

एक अन्य मामले में, गोपाल सेन को सोसाइटी में जमा राशि नहीं मिलने की शिकायत पर 10 हजार रुपये की सहायता दी गई। इन फैसलों से प्रभावित लोगों को तत्काल राहत मिली और प्रशासन की सक्रियता भी नजर आई।

कुल मिलाकर, इस जनसुनवाई ने यह दिखा दिया कि प्रशासन अब जनता की समस्याओं को लेकर ज्यादा संवेदनशील और सख्त हो गया है।

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