भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं की खरीदी की जाना है, जिसको लेकर सरकार ने तैयारियां पूरी कर ली है, इस बार किसानों की सुविधाओं के लिए तमाम प्रयास किए गए हैं, खरीदी केंद्रों पर असुविधा होने पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स को ताकीद कर दिया है कि किसी भी तरह की दिक्कत आती नजर आई तो कार्रवाई के लिए तैयार रहें। गेहूं की खरीदी के लिए राज्य सरकार 20 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने वाली है, जिसके चलते आधुनिक खरीदी केंद्रों के जरिए किसानों को पानी, कम रेट में भोजन जैसी सुविधाओं की व्यवस्था की है।
सरकार ने किए विशेष इंतजाम
प्रदेश में गेहूं की खरीदी के लिए 3 हजार 623 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 240 केंद्र सीहोर और 197 केंद्र उज्जैन जिले में बनें हैं। इस बार खास बात यह है कि पहली बार खरीदी केंद्रों की ग्रेडिंग भी की जाएगी। वहीं सरकार ने गेहूं की खरीदी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी जारी कर दी है। इस बार राज्य में 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। ये पिछले साल से 5 लाख टन ज्यादा है। वहीं
खरीदी केंद्रों पर विशेष इंतजाम
गेहूं की खरीदी के लिए बनाए गए केंद्रों पर सरकार ने 16 प्रकार की सुविधाओं को सुनिश्चित किया है। इसमें आधुनिक तौल कांटे, शेड, बाउंड्री वाल, पेयजल, टेंट, बैठने की व्यवस्था, तौल मशीन, इंटरनेट जैसी कई जरूरी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इसके लिए एक पोर्टल तैयार किया गया है। इसमें सभी केंद्रों को इन सुविधाओं की जानकारी अपलोड करनी होगी। वहीं इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 15 मार्च से 5 मई तक गेहूं की खरीदी होगी। बाकी हिस्सों में ये 23 मार्च से 12 मई तक की जाएगी।
गेहूं खरीदी के लिए सरकार ने बनाए नियम
पिछले बार के रिकॉर्ड के अनुसार खराब परफॉर्मेंस वाले खरीदी केंद्रों को अबकी बार मौका नहीं दिया गया है। खरीदी केंद्रों का दायरा 25 किलोमीटर के भीतर तय किया गया है। गोदाम और समिति स्तर पर केंद्रों का आकार तीन हजार से पांच हजार टन तक होगा। जरूरत पड़ने पर 50 प्रतिशत बढ़ाया जा सकेगा। 500 टन से कम गेहूं खरीदी होने की स्थिति में पड़ोसी केंद्रों में विलय कर दिया जाएगा। गेहूं की कुल खरीदी में केवल 1 प्रतिशत ही मानक से कम होगी। सीहोर और उज्जैन के बाद विदिशा में 190, रायसेन में 189, सागर में 176, नर्मदापुरम में 171 और देवास में 136 केंद्र बनाए जाएंगे।
मिलर्स मिलिंग प्रक्रिया का बहिष्कार
मिलर्स और सरकार के बीच अपग्रेडेशन राशि को लेकर विवाद अभी भी बना हुआ है। नागरिक आपूर्ति निगम से अनुबंधित 492 मिलर्स ने अब तक कुल खरीदी गई धान का महज 4% मिलिंग किया है। यह आंकड़ा लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन धान के बराबर है।


