मध्य प्रदेश कांग्रेस ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ा कदम उठाया है. पार्टी नेतृत्व ने भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के कई पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देशों के बाद NSUI के 22 जिलाध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. इस कार्रवाई के बाद संगठन के भीतर हलचल तेज हो गई है.
मीनाक्षी नटराजन प्रकरण के बाद बढ़ी सख्ती
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद सामने आया. कांग्रेस ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रदेशभर में जनता के बीच ले जाने की रणनीति बनाई थी. पार्टी ने भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और जनजागरण कार्यक्रमों की विस्तृत योजना तैयार की थी. प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की ओर से सभी जिला इकाइयों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि निर्धारित तिथियों पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएं. इसके लिए अलग-अलग संगठनों को जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं.

तीन दिन का प्रदर्शन कार्यक्रम किया गया था तय
कांग्रेस की योजना के अनुसार 15 जून को युवा कांग्रेस द्वारा प्रदर्शन किया जाना था. इसके बाद 16 जून को NSUI को विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई थी. वहीं 17 जून को महिला कांग्रेस को मैदान में उतरना था. पार्टी नेतृत्व को उम्मीद थी कि सभी जिलों में कार्यकर्ता सक्रिय रूप से भाग लेंगे और सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करेंगे. हालांकि ऐसा नहीं हो सका.
22 जिलों में नहीं हुए अपेक्षित कार्यक्रम
सूत्रों के अनुसार प्रदेश के 22 जिलों में NSUI की जिला इकाइयां पार्टी के निर्देशों के अनुरूप प्रदर्शन आयोजित नहीं कर सकीं. कई स्थानों पर कार्यक्रम या तो नहीं हुए या फिर अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाए. इसे कांग्रेस नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है. पार्टी का मानना है कि संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करना और शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों की अनदेखी करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है. इसी वजह से संबंधित जिलाध्यक्षों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है.
तीन दिन में मांगा गया जवाब
जारी नोटिस में सभी जिलाध्यक्षों से तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है. उनसे पूछा गया है कि पार्टी के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया. कांग्रेस नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. राजनीतिक गलियारों में इस कदम को संगठनात्मक अनुशासन स्थापित करने की दिशा में कांग्रेस की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है.
