मध्य प्रदेश के मैहर जिले में मीजल्स यानी खसरे का संक्रमण एक बार फिर चिंता का कारण बन गया है. जिले के अजमाइन गांव में इस वायरस की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. अब तक छह बच्चों में मीजल्स संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि एक तीन वर्षीय मासूम की इलाज के दौरान मौत हो गई. इस घटना के बाद गांव में स्वास्थ्य टीमों की निगरानी बढ़ा दी गई है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया गया है.
बच्चों में दिखे खसरे के लक्षण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले कुछ दिनों से गांव के कई बच्चों में बुखार के साथ शरीर पर लाल दाने निकलने की शिकायत सामने आ रही थी. इसके अलावा कई बच्चों को सर्दी, जुकाम, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं भी हुईं. लक्षणों को देखते हुए मेडिकल टीम ने बच्चों के सैंपल लेकर जांच कराई. रिपोर्ट आने पर एक से पांच वर्ष की आयु के छह बच्चों में मीजल्स संक्रमण की पुष्टि हुई. इसके बाद पूरे गांव में स्वास्थ्य सर्वे और निगरानी तेज कर दी गई.
तीन वर्षीय उमंग की नहीं बच सकी जान
अजमाइन गांव के रहने वाले तीन वर्षीय उमंग पटेल की तबीयत 6 जून को खराब हुई थी. शुरुआत में उसे तेज बुखार आया और अगले दिन उसके शरीर पर दाने दिखाई देने लगे. 8 जून तक उल्टी और दस्त की शिकायत भी शुरू हो गई, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई. परिजन उसे इलाज के लिए कटनी जिले के कैमोर स्थित एक निजी अस्पताल ले गए. बाद में हालत ज्यादा गंभीर होने पर उसे मैहर के सिविल अस्पताल लाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. बाद में आई जांच रिपोर्ट में उसके मीजल्स संक्रमित होने की पुष्टि हुई.
मई से लगातार सामने आ रहे मामले
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार सतना और आसपास के क्षेत्रों में मई महीने से ही मीजल्स के मामले मिलने शुरू हो गए थे. शुरुआती 15 दिनों के भीतर पांच संक्रमित बच्चों की पहचान हुई थी. इसके बाद सतना शहर के राजेंद्र नगर सहित कई इलाकों में सात और मरीज मिले. अब मैहर के अजमाइन गांव में छह नए मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ गई है. जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सुचित्रा अग्रवाल द्वारा तैयार प्रतिवेदन में संभावना जताई गई है कि यह संक्रमण पन्ना जिले से गांव तक पहुंचा. रिपोर्ट के अनुसार पीयूष पटेल और प्रद्युम पटेल अपने पिता के साथ पन्ना में रह रहे थे. बीमार होने के बाद वे अजमाइन स्थित रिश्तेदारों के यहां आए. इसके बाद उसी मोहल्ले के अन्य परिवारों में भी संक्रमण फैलने लगा. प्रशासन अब संक्रमित बच्चों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर रहा है और टीकाकरण के साथ स्वास्थ्य जांच अभियान भी तेजी से चला रहा है ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके.
