पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद अब मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने जा रही हैं, क्योंकि दिग्विजय सिंह, जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह का कार्यकाल समाप्त होने वाला है. मौजूदा विधानसभा गणित के मुताबिक एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. संख्या बल के आधार पर दो सीटें बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिखाई दे रही है. हालांकि चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर क्रॉस वोटिंग की आशंका ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है.
कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को एक-दो नहीं बल्कि करीब सात विधायकों के टूटने या क्रॉस वोटिंग करने का डर सता रहा है. यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व पूरी तरह सतर्क हो गया है और मामला दिल्ली हाईकमान तक पहुंच चुका है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव से पहले प्रदेश में एक बार फिर ऑपरेशन लोटस सक्रिय हो सकता है. माना जा रहा है कि बीजेपी अतिरिक्त सीट जीतने के लिए रणनीति तैयार कर रही है.
सियासी हलचल तेज
इसी बीच एक कांग्रेस विधायक की बीजेपी नेताओं से मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी है. जानकारी के मुताबिक बालाघाट जिले की परसवाड़ा सीट से कांग्रेस विधायक मधु भाऊ भगत ने 6 मई को भोपाल में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से मुलाकात की थी. बताया जा रहा है कि इस मुलाकात को काफी गोपनीय रखा गया. हालांकि मधु भाऊ भगत ने इन दावों को सामान्य मुलाकात बताते हुए कहा कि वीडी शर्मा से उनकी कोई विशेष चर्चा नहीं हुई और नरोत्तम मिश्रा से भी मुलाकात अचानक हुई थी.
दिल्ली में हाई लेवल मीटिंग
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि जिन विधायकों पर क्रॉस वोटिंग का शक जताया जा रहा है, उनमें ज्यादातर नेता ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से जुड़े हुए हैं. यह वही इलाका है जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रभाव माना जाता है. बताया जा रहा है कि कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए कुछ नेता इन विधायकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी तरफ कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रही है. दिल्ली में इसे लेकर हाईलेवल बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें कमलनाथ, जीतू पटवारी, दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी शामिल हुए. बैठक में संभावित क्रॉस वोटिंग पर विस्तार से चर्चा हुई और नेताओं को विधायकों के संपर्क में रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई. फिलहाल राज्यसभा चुनाव नजदीक आते ही प्रदेश की सियासत और ज्यादा गर्माने लगी है.
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