भोपाल। मध्य प्रदेश में बढ़ती गर्मी, ट्रैफिक जाम और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को प्रस्ताव भेजकर सरकारी और निजी संस्थानों में यह व्यवस्था लागू करने की अपील की है।
दिल्ली मॉडल के बाद मध्य प्रदेश में उठी मांग
दिल्ली सरकार द्वारा ऊर्जा संरक्षण और प्रदूषण कम करने के लिए सप्ताह में दो दिन घर से काम और मेट्रो मंडे लागू किए जाने के बाद मध्य प्रदेश में भी इस व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन लाइफ अभियान के बाद इस तरह के उपायों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकारी और निजी दफ्तरों के लिए सुझाव
अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा और कर्मचारी पेंशनर्स महासंघ ने सरकार को भेजे पत्र में कहा है कि सरकारी विभागों के साथ निजी संस्थानों में भी सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाए। संयुक्त मोर्चा के संयोजक एसबी सिंह का कहना है कि इससे पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी और लोगों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।

गर्मी, ट्रैफिक और खराब सड़कों से राहत
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि भीषण गर्मी और शहरों में बढ़ते ट्रैफिक के कारण रोजाना कार्यालय पहुंचना कठिन होता जा रहा है। खराब सड़कों और लंबे सफर से कर्मचारियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ रहा है।
पर्यावरण संरक्षण और खर्च में कमी की उम्मीद
संगठनों का मानना है कि वर्क फ्रॉम होम लागू होने से सरकारी दफ्तरों में बिजली की खपत घटेगी और सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होने से प्रदूषण में भी कमी आएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन संकट के बीच यह व्यवस्था आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो सकती है। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री के निर्णय पर टिकी है।
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