देवास/पवन उपाध्याय/खबर डिजिटल/ खबर डिजिटल ने कुछ दिन पहले क्षेत्र से आदिवासियों के पलायन की खबर प्रकाश में लाई थी, अब इस खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। मप्र स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर अभ्यारण्य बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री की इस घोषणा से खंडवा एवं बागली विधानसभा के सतवास, कांटाफोड़, पुंजापुरा, पिपरी वन परिक्षेत्र अभ्यारण्य का हिस्सा होकर सागवान के घने जंगलों, नर्मदा नदी, बाघ तेंदुए भालू सहित बड़ी संख्या में वन्यजीव, कावडीया पहाड़, सीता मन्दिर सहित प्राकृतिक सोंदर्य से भरा अंचल को पर्याप्त विकास से ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा। जिससे सम्पूर्ण क्षेत्र में खुशी की लहर है, ग्रामीण सरकार को धन्यवाद दे रहे हैं।
इलाके में काफी दर्शनीय स्थल
यहां विश्व विख्यात क्रिस्टल आकर के पेंसिल या लकड़ियों के पीठे की तरह 3 से 6 मीटर लम्बाई वाले पत्थरों के 7 पहाड़ो की श्रृंखला भूगर्भीय घटना से उत्पन्न अद्भुत आश्चर्य रोमांचित करने वाले कावड़िया पहाड़ हैं, जिन्हें पर्यटक अभ्यारण्य के कारण देखने आएगें, इनकी धार्मिक किवदंती नर्मदा से भीम के विवाह के प्रस्ताव पर नर्मदा का प्रवाह रोकने के लिए अपने कांधे पर कावड़ के रूप में एकत्रित करने से पहाड़ बना है, ऐसी मान्यता है।
611 वर्ग किलोमीटर का होगा अभ्यारण्य
इंदिरा सागर बांध के निर्माण की स्वाकृति के करीब 39 साल बाद ओंकारेश्वर वन्यप्राणी अभयारण्य की हरी झंडी मिलीं है, ओंकारेश्वर अभ्यारण्य 611 वर्ग किलोमीटर का होगा, जिसमें खंडवा और देवास जिले का वन क्षेत्र शामिल होगा। देवास जिले के 4 वन परिक्षेत्र के 267.47 हेक्टेयर जंगल ओंकारेश्वर अभ्यारण्य योजना के तहत करोड़ों रुपये चारों वन परिक्षेत्र की फेंसिंग जंगलों में सड़क विभाग के कार्यालय भवन सहित अन्य कार्य किए गए थे। जिन्हें राज्य शासन की अनुमति के बाद अन्य कार्य तेजी से किये जाएंगें।
आदिवासी इलाके से पलायन
दरअसल बागली विधानसभा आदिवासी होकर आदिवासी अंचल में कृषि मजदूरी प्रमुख के अलावा कोई साधन नहीं होने से बड़ी संख्या में गुजरात और महाराष्ट्र सहित आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीण रोजगार की तलाश में पलायन करते हैं, लेकिन अभ्यारण्य बनने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पलायन रुकेगा।


