प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए विकास, आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी क्षमता को भारत की प्रगति का आधार बताया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ के स्वर गूंजे और इस अवसर ने पूरे देश में राष्ट्रभाव को मजबूत किया. पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के समय भारत के सामने बड़े सपने थे, लेकिन लंबे समय तक ‘होती है’, ‘चलती है’, ‘हो जाएगा’ और ‘देखा जाएगा’ जैसी मानसिकता ने देश की रफ्तार को प्रभावित किया. उनके अनुसार किसी राष्ट्र की प्रगति केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि उसकी सोच, संकल्प और अपनी क्षमता पर विश्वास से तय होती है.
विकास के लिए ‘शक्ति की सप्त धारा’
प्रधानमंत्री ने देश की आर्थिक और रणनीतिक मजबूती के लिए ‘शक्ति की सप्त धारा’ का उल्लेख किया. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन, गति-शक्ति, रक्षा क्षेत्र, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की सॉफ्ट पावर को प्रमुखता दी गई. उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान दिलाने के लिए गुणवत्ता, लागत और उत्पादन के पैमाने पर प्रतिस्पर्धी बनना जरूरी है. कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के रूप में स्थापित करने के साथ तकनीक, डिजिटल कनेक्टिविटी और आधुनिक बुनियादी ढांचे को भी तेजी से आगे बढ़ाना होगा.
रक्षा और तकनीक में आत्मनिर्भरता
पीएम मोदी ने ड्रोन, सुपरसोनिक तकनीक और नई पीढ़ी की रक्षा प्रणालियों पर विशेष ध्यान देने की बात कही. उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में भारत का रक्षा उत्पादन करीब चार गुना बढ़ा है. इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में लगभग सात गुना वृद्धि दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि आधुनिक रेलवे कोच का उत्पादन 21 गुना और मोबाइल फोन का उत्पादन 33 गुना बढ़ा है. खादी और ग्रामोद्योग के उत्पादन में भी लगभग पांच गुना बढ़ोतरी हुई है. प्रधानमंत्री के मुताबिक ये बदलाव भारत की बढ़ती औद्योगिक क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं.
परमाणु ऊर्जा से मजबूत होगी ऊर्जा सुरक्षा
ऊर्जा क्षेत्र में भारत के भविष्य की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने 200 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य सामने रखा. उन्होंने बताया कि देश में पांच नए परमाणु रिएक्टर लगाए जा रहे हैं. पाइप वाली गैस की सुविधा अब 1.75 करोड़ घरों तक पहुंच चुकी है, जबकि 50 लाख से अधिक परिवार सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं. मोदी ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में भारत की उपलब्धि को भी अहम बताया. उन्होंने कहा कि यह परमाणु ईंधन के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
सुधारों को बताया सरकार का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के लिए सुधार किसी मजबूरी या केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संकल्प हैं. उनका कहना था कि कोई भी देश तभी बड़ी उपलब्धियां हासिल करता है, जब वह अपने सपनों को संकल्प में बदलकर अपनी क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल करता है.
उन्होंने पिछले 12 वर्षों में भारत की विकास यात्रा में नागरिकों की भूमिका की भी सराहना की. पीएम ने दलितों, आदिवासियों, ग्रामीण और शहरी नागरिकों, गरीबों, मध्यम वर्ग, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों समेत समाज के विभिन्न वर्गों के योगदान को देश की प्रगति का आधार बताया.
‘दिमागी नक्सलियों’ पर भी निशाना
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने हथियारबंद नक्सली हिंसा पर सरकार की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अब उन विचारों को भी चुनौती देने की जरूरत है जो देश की प्रगति में बाधा बनते हैं. उन्होंने ऐसे लोगों के लिए ‘दिमागी नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया और उन्हें अलग-थलग करने की बात कही.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने कई ऐसे क्षेत्रों को, जिन्हें कभी ‘नो-गो एरिया’ माना जाता था, अब ‘गो-अहेड एरिया’ में बदल दिया है. उनके मुताबिक देश को अपनी सीमित सोच से बाहर निकलकर बड़े लक्ष्य तय करने होंगे.
अंत में पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के विकसित राष्ट्र बनने पर भारत को देखने का वैश्विक नजरिया भी बदलेगा. उन्होंने भरोसा जताया कि 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प, सामर्थ्य और सामूहिक प्रयास से भारत आने वाले समय में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा.
