कटनी। जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों में आउटसोर्स अधीक्षकों की नियुक्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कई छात्रावासों में नियमित अधीक्षकों के स्थान पर आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं।सबसे बड़ा सवाल छात्रावासों में रह रही छात्राओं की सुरक्षा को लेकर खड़ा हो रहा है। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी आउटसोर्स व्यवस्था के भरोसे छोड़ना कितना उचित है, इस पर विभाग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।चर्चा का विषय यह भी है कि यदि किसी छात्रावास में कोई अप्रिय घटना या सुरक्षा संबंधी अनहोनी होती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी—आउटसोर्स अधीक्षक, संबंधित एजेंसी या फिर आदिम जाति कल्याण विभाग की?हालांकि, इस संबंध में विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। यदि विभाग के नियमों के तहत यह नियुक्तियां की गई हैं, तो उनकी प्रक्रिया, पात्रता और जवाबदेही को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि छात्राओं की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान हो सके।अब सभी की निगाहें आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों पर हैं कि वे इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाते हैं।
कटनी से सौरभ श्रीवास्तव की रिपोर्ट मो. 9131308097
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