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राजगढ़ बनता जा रहा नशे का हब?… 5 करोड़ का एमडी ड्रग्स केमिकल जब्त

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

राजगढ़/धर्मराज सिंह/खबर डिजिटल/ राजगढ़ जिला धीरे-धीरे नशे का हब बनता जा रहा है। एक ओर पुलिस बड़ी-बड़ी कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले में अपराध बेलगाम होते जा रहे हैं। अवैध शराब, नशा, चोरी, लूट और डकैती की बढ़ती घटनाएं पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। ताजा मामला माचलपुर थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने ड्रग्स माफिया के खिलाफ बड़ी एनडीपीएस कार्रवाई करते हुए एमडी ड्रग्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाला करीब 266 किलो केमिकल जब्त किया है। पुलिस के मुताबिक इस केमिकल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 5 करोड़ रुपये आंकी गई है।

एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज
यह कार्रवाई ग्राम आदमपुरा के जंगल क्षेत्र में की गई। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि खेत में बनी एक खंती के अंदर संदिग्ध सामग्री छिपाकर रखी गई है। सूचना के आधार पर पुलिस मौके पर पहुंची और साक्षियों की मौजूदगी में तलाशी ली। तलाशी के दौरान 5 नीले ड्रमों में भरा केमिकल बरामद किया गया। पुलिस का कहना है कि जब्त किया गया केमिकल एमडी ड्रग्स के निर्माण में प्रयुक्त किया जाता है। इस मामले में थाना माचलपुर में अपराध क्रमांक 35/2026, धारा 30 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।

यहीं से उठते हैं बड़े सवाल
गौर करने वाली बात यह है कि माचलपुर थाना क्षेत्र से महज 10 किलोमीटर दूर घोघटपुर गांव में कुछ समय पहले भी ड्रग्स फैक्ट्री पर बड़ी कार्रवाई की गई थी, जहां करीब 4 करोड़ रुपये की स्मैक और अन्य सामग्री जब्त की गई थी। लगातार सामने आ रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि यह पूरा इलाका लंबे समय से ड्रग तस्करों और नशा माफिया के निशाने पर रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि थाना क्षेत्र से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर इतने लंबे समय से ड्रग्स फैक्ट्रियां कैसे चल रही थीं? क्या पुलिस को इसकी भनक नहीं थी? या फिर किसी दबाव अथवा सांठगांठ के चलते समय रहते कार्रवाई नहीं हो पाई? सूत्रों की मानें तो इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस गोरखधंधे की जानकारी स्थानीय स्तर की मिलीभगत के बिना संभव नहीं मानी जा सकती।

अपराध बढ़े, निगरानी पर सवाल
जिले में बीते कुछ महीनों में डकैती, लूट, अवैध शराब, नशे और अब करोड़ों के केमिकल की बरामदगी आम जनता की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। हालांकि पुलिस इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बता रही है, लेकिन सवाल यह भी है कि अगर समय रहते निगरानी होती, तो क्या यह नेटवर्क पहले ही नहीं टूट सकता था? अब देखना यह होगा कि यह कार्रवाई केवल एक-दो मामलों तक सीमित रहती है या फिर पूरे नशा नेटवर्क, इसके सरगनाओं और संभावित मिलीभगत की परतें भी खोली जाती हैं।

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