Tuesday, November 3, 2026
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भर्ती में पारदर्शिता या अपनों को मौका? अमाड़ी-सिजहनी की सेल्समैन नियुक्तियों पर शिकायत”

कटनी खबर डिजिटल– बड़वारा विकासखंड की वृहताकार सहकारी समिति कांटी-अमाड़ी के अंतर्गत आने वाले अमाड़ी और सिजहनी वितरण केंद्रों में सेल्समैन की नियुक्तियों को लेकर शिकायत ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता ने कलेक्टर को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि दोनों केंद्रों में रिक्त पदों पर सार्वजनिक विज्ञापन जारी किए बिना ही नियुक्तियां कर दी गईं। शिकायत में यह भी आरोप है कि पदों पर संबंधित कर्मचारियों के बेटों को नियुक्त किया गया।शिकायतकर्ता ने नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने के साथ चयन समिति की कार्यवाही, समिति के प्रस्ताव, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता दस्तावेज और शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कराने की मांग की है।अमाड़ी में पिता पद पर, बेटा नियुक्त—शिकायत में सवालशिकायत के मुताबिक अमाड़ी वितरण केंद्र में सेल्समैन के पद पर कार्यरत बाबू सेन के पुत्र आदर्श सेन की वर्ष 2024 में सेल्समैन के पद पर नियुक्ति की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस पद के लिए न तो सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया गया और न ही अन्य अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए।ऐसे में शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि पद रिक्त था तो योग्य अभ्यर्थियों को अवसर देने के लिए भर्ती सूचना सार्वजनिक क्यों नहीं की गई और नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत की गई?सिजहनी में भी बेटे की नियुक्ति का आरोपसिजहनी वितरण केंद्र को लेकर शिकायत में कहा गया है कि सेल्समैन रामकृष्ण गौतम के इस्तीफे के बाद उनके पुत्र निलेश कुमार गौतम उर्फ छोटू गौतम को सेल्समैन पद पर नियुक्त किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यहां भी भर्ती के लिए सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई।शिकायत में नियुक्ति के बदले कथित आर्थिक लेन-देन का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।‘क्या रिश्तेदारों की नियुक्ति पर रोक वाले नियम लागू हुए?’शिकायतकर्ता ने वर्ष 2011 के सेवा नियमों का हवाला देते हुए दावा किया है कि समिति से जुड़े कर्मचारियों के नाते-रिश्तेदारों की नियुक्ति को लेकर नियम निर्धारित हैं। इसी आधार पर शिकायत में दोनों नियुक्तियों की नियमसम्मत जांच की मांग की गई है।अब जांच में यह सामने आना है कि नियुक्ति के समय कौन-से सेवा नियम प्रभावी थे और संबंधित प्रावधानों का पालन किया गया था या नहीं।शैक्षणिक प्रमाण-पत्र भी जांच के घेरे मेंनिलेश कुमार गौतम के शैक्षणिक प्रमाण-पत्र को लेकर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं। आवेदन में संबंधित शिक्षण संस्था से प्रमाण-पत्र का सत्यापन कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि जांच में दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।पुरानी शिकायत के बाद धमकी का भी आरोपशिकायतकर्ता ने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि उसने पूर्व में रामकृष्ण गौतम की कथित आय से अधिक संपत्ति की जांच के लिए ईओडब्ल्यू में शिकायत की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध किए जाने के बावजूद उसकी पहचान सामने आ गई। इसके बाद मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप लगाया गया है।शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ अपनी पहचान गोपनीय रखने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।कागज खुलेंगे तो सामने आएगी भर्ती की पूरी कहानी’पूरे मामले में सबसे अहम सवाल नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर है। क्या दोनों पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ था? कितने अभ्यर्थियों ने आवेदन किया? चयन समिति ने किन आधारों पर उम्मीदवारों का चयन किया? समिति की बैठक और प्रस्ताव की प्रति कहां है? नियुक्त कर्मचारियों की योग्यता का सत्यापन हुआ या नहीं? और क्या रिश्तेदारी से जुड़े सेवा नियमों का पालन किया गया?फिलहाल ये सभी आरोप शिकायतकर्ता के आवेदन पर आधारित हैं। संबंधित पक्षों का पक्ष और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियुक्तियां निर्धारित नियमों के तहत हुईं या भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई।

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