अरविंद तिवारी/ खबर डिजिटल/रीवा/ जिले के जवा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बसरेही में अपनी जायज मांगों को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। गांव में अस्पताल निर्माण की मांग को लेकर क्षेत्रवासी पिछले सात दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। प्रशासन की अनदेखी और टालमटोल वाले रवैये ने ग्रामीणों के आक्रोश को और भड़का दिया है, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
आवंटित भूमि का स्थानांतरण
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि पूर्व में बसरेही में ही अस्पताल निर्माण के लिए सरकारी जमीन आवंटित की जा चुकी थी। लेकिन अब प्रशासनिक स्तर पर उस जमीन को बदलकर अस्पताल को कहीं और स्थानांतरित करने की साजिश रची जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अस्पताल यहां नहीं बना, तो आसपास के दर्जनों गांवों की एक बड़ी आबादी बेहतर इलाज से वंचित रह जाएगी। वर्तमान में लोगों को छोटी-मोटी बीमारियों के लिए भी जवा, अतरैला या चौखड़ी जैसे दूरस्थ इलाकों की दौड़ लगानी पड़ती है, जो समय और पैसे दोनों की बर्बादी है।
बीएमओ पर गंभीर आरोप
आंदोलनकारियों ने जवा अस्पताल के बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) पर भी गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप जड़े हैं। उनका दावा है कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर उसे आबादी भूमि में दर्ज करा लिया गया है, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थिति को संभालने के लिए तहसीलदार राजेश शुक्ला और थाना प्रभारी विजय सिंह परिहार भारी पुलिस बल के साथ अनशन स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसी ठोस आश्वासन के अभाव में वार्ता विफल रही।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, अनशन स्थल पर जनसमर्थन बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक बसरेही में अस्पताल निर्माण का कार्य धरातल पर शुरू नहीं होता, उनका अनशन खत्म नहीं होगा। यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकाला, तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
