राकेश यादव/ खबर डिजिटल/ सिवनी। जिले के शासकीय हाईस्कूल कलारबांकी में हाल ही में घोषित हुए हाईस्कूल के परीक्षा परिणामों ने न केवल विभाग की साख पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन 60 परिवारों के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है जिनके बच्चे इस परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहे हैं।
खबर का बड़ा असर: DEO ने थमाया नोटिस
स्थानीय मीडिया में खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एक्शन मोड में आ गए हैं। गौरतलब है कि इस स्कूल से कुल 97 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें से महज 37 ही सफल हो सके। आधे से अधिक छात्रों के फेल होने की इस चौंकाने वाली रिपोर्ट ने मुख्यालय तक हड़कंप मचा दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए DEO ने तत्काल प्रभाव से शाला प्राचार्य और संबंधित विषय शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
नोटिस छिपाने की कोशिश?
विभाग की इस कार्रवाई के बाद स्कूल प्रबंधन के पसीने छूट रहे हैं। हैरानी की बात तब हुई जब मीडिया कर्मियों ने पारदर्शिता के नाते नोटिस की प्रति देखनी चाही, तो प्राचार्य और शिक्षकों ने उसे दिखाने से साफ इनकार कर दिया। स्कूल प्रशासन का यह अड़ियल रवैया कई गंभीर संदेहों को जन्म दे रहा है। आखिर ऐसी क्या बात है जिसे स्कूल प्रबंधन सार्वजनिक करने से कतरा रहा है?
लापरवाही या सिस्टम की नाकामी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस शर्मनाक प्रदर्शन के पीछे असली जिम्मेदार कौन है? क्या शिक्षकों ने साल भर कक्षाएं नहीं लीं, या फिर प्रशासनिक मॉनिटरिंग में कोई बड़ी चूक हुई है? फिलहाल, शिक्षा विभाग की इस टेढ़ी नजर के बाद स्कूल में हलचल तेज है। जिले भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या केवल कागजी नोटिस देकर खानापूर्ति की जाएगी या इन लापरवाह जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई भी होगी।


