Scindia Supporter Resign: मध्यप्रदेश में हाल ही में हुई राजनीतिक नियुक्तियों के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग का सियासी पारा अचानक खौल उठा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक और पूर्व पार्षद देवेंद्र पाठक ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देने के बाद पाठक ने भाजपा संगठन और सरकार के खिलाफ जो तीखे बोल बोले हैं, उससे पूरी पार्टी में हड़कंप मच गया है।
पहुंचे छतरी, फूट दर्द
यह पूरा सियासी ड्रामा दिवंगत माधवी राजे सिंधिया की पुण्यतिथि के मौके पर देखने को मिला। देवेंद्र पाठक उनकी छतरी पर पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे थे। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए उनका दर्द और गुस्सा खुलकर जुबान पर आ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में सिंधिया और उनके वफादारों को जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है। देवेंद्र पाठक ने भाजपा नेतृत्व पर सीधे हमले बोलते हुए सिंधिया समर्थक मंत्रियों को भी आड़े हाथों लिया।
मंत्रियों की अनदेखी
पाठक ने दावा किया कि सूबे के कद्दावर मंत्री तुलसीराम सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर और गोविंद सिंह राजपूत जैसे नेताओं की सरकार में कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री भी उनकी बात नहीं सुन रहे और उनके क्षेत्रों के काम अटके हुए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई 60 से ज्यादा नियुक्तियों में सिंधिया समर्थकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
समझ रहे सिंधिया को पागल
पूर्व पार्षद ने कड़े शब्दों में कहा कि आज भाजपा में सिंधिया महाराज का वजन घटाने की कोशिश हो रही है। जब उनके लोगों को जगह ही नहीं मिल रही, तो प्रद्युम्न सिंह, गोविंद सिंह और तुलसी सिलावट जैसे मंत्री पदों के लालच में क्यों बैठे हैं? उन्हें तुरंत अपनी ताकत दिखाते हुए सामूहिक इस्तीफा दे देना चाहिए, ताकि सरकार को महाराज की असली ताकत का अंदाजा हो सके। भाजपा वाले सिंधिया को पागल समझ रहे हैं।
दिया पार्टी से इस्तीफा
उन्होंने आगे कहा कि जब मैं एक छोटा पार्षद होकर नहीं डरा और स्वाभिमान के लिए इस्तीफा दे दिया, तो ये बड़े नेता पदों के लालच में क्यों डर रहे हैं? बीजेपी का दामन छोड़ने के बाद जब देवेंद्र पाठक से कांग्रेस में शामिल होने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब तो नहीं दिया, लेकिन ग्वालियर के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि वे जल्द ही कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं।फिलहाल, पाठक ने साफ किया है कि वे सिंधिया राजघराने द्वारा शाम को आयोजित भजन संध्या कार्यक्रम से भी दूरी बना सकते हैं। अब पूरी भाजपा की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बगावत का असर महल और भोपाल में बैठे आलाकमान पर क्या पड़ता है।



