सिवनी/विशाल भारद्वाज/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश का सिवनी जिला अलग-अलग प्रजातियों के जीव जंतुओं से भरा हुआ है, अधिकांश क्षेत्र में जंगल है तो कुछ क्षेत्रों में खुले मैदान है, जिले का लखनादौन विधानसभा का अधिकांश क्षेत्र खुले मैदान नुमा पठारी क्षेत्र कहलाता है। जहां पर सामान्य से लेकर जहरीले जीव-जंतु पाए जाते हैं। ऐसे में घंसौर विकासखंड में स्थित कन्या आश्रम में पठारी क्षेत्र में एक अनोखा जीव गोह घुस गया, जिसका सर्पमित्र ने सफल रेस्क्यू किया।
बाथरूम में घुसा था जहरीला जीव
मामला शासकीय कन्या आश्रम बरौदामाल का है, जहां पर कक्षा पहली से पांचवी तक की छात्राएं छात्र छात्रावास में रहकर अध्ययन करती हैं, सुबह-सुबह बाथरूम में एक बच्ची को बड़ी छिपकली जैसा जीव नजर आया, बच्ची घबराते हुए अधीक्षिका के पास पहुंची और जानकारी दी। तब अधीक्षका और छात्रावास की कर्मचारी बाथरूम में पहुंची तो देखा कि डेढ़ फीट लंबा छिपकली नुमा जहरीला जीव गोह है। छात्रावास प्रबंधन ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी, वन विभाग के कर्मचारी रेस्क्यू करने नहीं पहुंचे. स्थानीय ग्रामीणों ने इसकी सूचना घंसौर के सर्पमित्र गोलू बर्मन को दी जो तत्काल आश्रम पहुंचे और जहरीले जीव गोह का सफल रेस्क्यू कर उसे जंगल में छोड़ दिया।
गोह के बारे में मुख्य बातें
जहरीला नहीं होता: गोह जहरीला नहीं होता है। उसके काटने से सीधे ज़हर नहीं फैलता, लेकिन उसके दांतों में बैक्टीरिया हो सकते हैं जो संक्रमण पैदा कर सकते हैं।
काटने पर क्या होता है: गोह के काटने से मृत्यु नहीं होती है, लेकिन संक्रमण के कारण गंभीर समस्या हो सकती है।
स्वभाव और व्यवहार: गोह गुस्सैल हो सकता है और अपनी आत्मरक्षा में काट सकता है। यह दौड़ने और तैरने में माहिर होती है और पेड़ों पर भी चढ़ सकती है।
आहार: यह मांसाहारी है और पक्षियों के अंडे, मेंढक, कीड़े-मकोड़े और चूहे खाती है।
भ्रम: कई लोग गोह को बहुत खतरनाक मानते हैं, लेकिन यह सच नहीं है। इसके छोटे बच्चों को ‘गोहेरा’ कहा जाता है।
उपचार: अगर गोह काट ले, तो घाव को लाल दवा (पोटेशियम परमैंगनेट) या अन्य एंटीसेप्टिक से साफ करना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।


