डेस्क। देश के टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 14 महीनों में प्रदेश में 81 बाघों की मौत दर्ज की गई है। इनमें वर्ष 2025 में 52 और वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 29 बाघों की मौत हो चुकी है। इस साल मौतों की रफ्तार पिछले साल की तुलना में काफी अधिक रही है।
कान्हा में सबसे ज्यादा बाघों की मौत
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 14 महीनों में कान्हा टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा 16 बाघों की मौत हुई। वर्ष 2025 में यहां 10 और 2026 के शुरुआती चार महीनों में 6 बाघों की जान गई। यह आंकड़ा प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक है।
बांधवगढ़ दूसरे नंबर पर
बाघों की मौत के मामलों में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व दूसरे स्थान पर है। यहां पिछले साल 8 और इस साल अब तक 5 बाघों की मौत दर्ज की गई है। यानी 14 महीनों में यहां कुल 13 बाघों की मौत हुई है।

करंट और आपसी संघर्ष बड़ी वजह
वन विभाग के अनुसार, अधिकतर मामलों में बाघों की मौत करंट लगने, आपसी संघर्ष और अन्य प्राकृतिक कारणों से हुई है। कुछ मामलों में मानवजनित कारण भी सामने आए हैं। छिंदवाड़ा में एक बाघ के शिकार का मामला भी दर्ज किया गया था। कई मामलों में मौत की असली वजह वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मादा बाघों की मौत ज्यादा
पिछले 14 महीनों में 37 मादा, 35 नर और 8 शावकों की मौत हुई है। वर्ष 2025 में 27 नर, 20 मादा और 3 शावकों की मौत दर्ज हुई थी। वहीं, 2026 के शुरुआती चार महीनों में 8 नर, 17 मादा और 5 शावकों की मौत हो चुकी है। इस साल औसतन हर महीने करीब 7 बाघों की मौत हुई है।

देश में सबसे ज्यादा बाघ मध्यप्रदेश में
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान की अखिल भारतीय बाघ आकलन 2022 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 3,682 बाघ हैं। इनमें सबसे ज्यादा 785 बाघ मध्यप्रदेश में हैं। इसी वजह से प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला हुआ है। कर्नाटक 563 और उत्तराखंड 560 बाघों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
पर्यटकों की पहली पसंद है एमपी के टाइगर रिजर्व
भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व को देश के सबसे बेहतर बाघ आवास क्षेत्रों में शामिल किया गया है। पिछले पांच वर्षों में मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व में 8 लाख 24 हजार 379 पर्यटक पहुंचे। इनमें 7 लाख 38 हजार 637 भारतीय और 85 हजार 742 विदेशी पर्यटक शामिल रहे।

कान्हा में सबसे ज्यादा बाघों की मौत
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 14 महीनों में कान्हा टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा 16 बाघों की मौत हुई। वर्ष 2025 में यहां 10 और 2026 के शुरुआती चार महीनों में 6 बाघों की जान गई। यह आंकड़ा प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक है।
बांधवगढ़ दूसरे नंबर पर
बाघों की मौत के मामलों में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व दूसरे स्थान पर है। यहां पिछले साल 8 और इस साल अब तक 5 बाघों की मौत दर्ज की गई है। यानी 14 महीनों में यहां कुल 13 बाघों की मौत हुई है।
करंट और आपसी संघर्ष बड़ी वजह
वन विभाग के अनुसार, अधिकतर मामलों में बाघों की मौत करंट लगने, आपसी संघर्ष और अन्य प्राकृतिक कारणों से हुई है। कुछ मामलों में मानवजनित कारण भी सामने आए हैं। छिंदवाड़ा में एक बाघ के शिकार का मामला भी दर्ज किया गया था। कई मामलों में मौत की असली वजह वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मादा बाघों की मौत ज्यादा
पिछले 14 महीनों में 37 मादा, 35 नर और 8 शावकों की मौत हुई है। वर्ष 2025 में 27 नर, 20 मादा और 3 शावकों की मौत दर्ज हुई थी। वहीं, 2026 के शुरुआती चार महीनों में 8 नर, 17 मादा और 5 शावकों की मौत हो चुकी है। इस साल औसतन हर महीने करीब 7 बाघों की मौत हुई है।
देश में सबसे ज्यादा बाघ मध्यप्रदेश में
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान की अखिल भारतीय बाघ आकलन 2022 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 3,682 बाघ हैं। इनमें सबसे ज्यादा 785 बाघ मध्यप्रदेश में हैं। इसी वजह से प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला हुआ है। कर्नाटक 563 और उत्तराखंड 560 बाघों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
पर्यटकों की पहली पसंद है एमपी के टाइगर रिजर्व
भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व को देश के सबसे बेहतर बाघ आवास क्षेत्रों में शामिल किया गया है। पिछले पांच वर्षों में मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व में 8 लाख 24 हजार 379 पर्यटक पहुंचे। इनमें 7 लाख 38 हजार 637 भारतीय और 85 हजार 742 विदेशी पर्यटक शामिल रहे।
ये खबर भी पढ़ें..
