भोपाल/लखनऊ/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय बाकी है, लेकिन कांग्रेस ने प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी के भीतर राहुल गांधी के नेतृत्व में यूपी को लेकर तीन मोर्चों पर एक साथ काम करने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। इसमें युवाओं और खासकर Gen-Z को पार्टी से जोड़ना, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे का फार्मूला समय रहते तय करना प्रमुख है। यूपी चुनाव 2027 के बाद एमपी चुनाव 2029 के लिए अभी से फॉर्मूला तय किया जा सकता है, क्योंकि जिस तरह से माहौल बन रहा है, उनको भुनाने के लिए दोनों पार्टियां तैयार है।
कांग्रेस-सपा गठबंधन का काउंटडाउन
कांग्रेस का आकलन है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से उत्तर प्रदेश में उसके लिए राजनीतिक संभावनाएं बढ़ी हैं। अब पार्टी 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को इस बढ़ी हुई जमीन को स्थायी राजनीतिक आधार में बदलने के अवसर के तौर पर देख रही है। एमपी के दतिया उपचुनाव में भी उसकी सफलता ने नए प्रतिमान स्थापित कर दिए, क्योंकि यहां पर लाड़ली बहना योजना तक का असर नहीं चला। बीजेपी के बड़े-बड़े दिग्गजों की मौजूदगी के बाद भी दतिया का रण कांग्रेस ने जीत लिया। जिसमें सपा ने भी यूपी के सीमावर्ती जिले में अपनी ताकत झोंकने का काम किया।उसी के चलते आने वाले वक्त में सपा-कांग्रेस गठबंधन नई बिसात बिछा सकता है।
छात्रों के मुद्दों के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश
कांग्रेस की युवा रणनीति में छात्रों के मुद्दों को खास महत्व दिया जा रहा है। इसी कड़ी में राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तीसरे चरण में प्रयागराज पहुंच रहे हैं। प्रयागराज कांग्रेस और गांधी परिवार के लिए राजनीतिक एवं ऐतिहासिक रूप से खास महत्व रखता है। शहर स्थित आनंद भवन लंबे समय तक पंडित जवाहरलाल नेहरू का आवास रहा और स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में कांग्रेस की गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र भी रहा। बाद में वर्ष 1970 में इंदिरा गांधी ने इसे भारत सरकार को दान कर दिया था। पार्टी नेताओं का दावा है कि संसद से लेकर सड़क तक छात्र और युवा वर्ग से जुड़े मुद्दों पर राहुल गांधी की सक्रियता का असर नई पीढ़ी में देखने को मिल रहा है। कांग्रेस को मिले फीडबैक के अनुसार, जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी रही।
सपा के साथ सीट बंटवारा जल्द तय करने की कवायद
कांग्रेस की यूपी रणनीति का दूसरा अहम पहलू समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को 10 जनपथ में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मौजूदगी में यूपी के कांग्रेस सांसदों की बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस के छह लोकसभा सांसदों के साथ राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, प्रमोद तिवारी और राजीव शुक्ला भी शामिल हुए। बैठक में सपा के साथ सीट बंटवारे की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। कांग्रेस के भीतर यह राय है कि संसद का मौजूदा सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने के बाद 20 अगस्त तक दोनों दलों के बीच समन्वय को लेकर औपचारिक तस्वीर साफ कर दी जानी चाहिए।
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राहुल-अखिलेश की जोड़ी कर सकती है कमाल
कांग्रेस और सपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच रिश्तों को लेकर पार्टी में फिलहाल सकारात्मक माहौल बताया जा रहा है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच बेहतर राजनीतिक तालमेल को गठबंधन के लिए अहम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों दलों के दूसरे स्तर के नेता सीटों और गठबंधन की रणनीति को लेकर समय-समय पर अलग-अलग बयान देते रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि सीट बंटवारे की प्रक्रिया समय रहते शुरू कर उसे अंतिम रूप दे दिया जाए तो चुनावी मैदान में उतरने से पहले संभावित मतभेदों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने पूर्व AAP मंत्री और अंबेडकरवादी नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है। जिसका रिजल्ट एमपी की चुनावी रणनीति पर भी पड़ता नजर आएगा।
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