खबर डिजिटल न्यूज़ रिपोर्टर /कटनी— पर्यावरण संरक्षण के सरकारी दावों के बीच कटनी जिले के सलैया (देवरी हटाई) क्षेत्र से सामने आए आरोपों ने प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रेड कैटेगरी में शामिल एथेनॉल निर्माता वीनस एग्रो फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड पर आरोप है कि वह पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए डिस्टिलरी से निकलने वाले अत्यधिक प्रदूषणकारी अपशिष्ट स्पेंट वॉश का खुले क्षेत्र और आसपास की सफेद मिट्टी की खदानों में अवैध निस्तारण कर रही है।
यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि कृषि भूमि, भूजल, पशुधन और आम नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।
रेड कैटेगरी उद्योग पर सबसे सख्त नियम, फिर भी खुले में अपशिष्ट फेंकने के आरोप
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार डिस्टिलरी और एथेनॉल उद्योग रेड कैटेगरी में आते हैं। ऐसे उद्योगों के लिए Zero Liquid Discharge (ZLD) प्रणाली लागू करना अनिवार्य माना जाता है।
इस व्यवस्था का स्पष्ट उद्देश्य है—
स्पेंट वॉश का खुले में निस्तारण पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।
अपशिष्ट को बिना उपचार के किसी भी भूमि, खदान, नाले या जलस्रोत तक नहीं पहुंचने दिया जाए।
पर्यावरण और भूजल को प्रदूषण से सुरक्षित रखा जाए।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि सलैया क्षेत्र में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
ग्रामीणों के आरोप: खदानें बनीं जहरीले अपशिष्ट का डंपिंग ग्राउंड
ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाला स्पेंट वॉश आसपास की खुली सफेद मिट्टी की खदानों और खुले स्थानों पर डाला जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार—
बारिश के दौरान यही जहरीला अपशिष्ट खेतों और जल स्रोतों तक पहुंचने का खतरा पैदा करता है।
पूरे इलाके में लगातार दुर्गंध फैल रही है।
कृषि भूमि की उर्वरता प्रभावित होने की आशंका है।
पशुधन और पर्यावरण पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह पर्यावरण संरक्षण संबंधी निर्धारित मानकों का गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है।
21 जुलाई की जनसुनवाई में शिकायत, फिर भी कार्रवाई पर सवाल
ग्रामीणों ने 21 जुलाई 2026 को कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में शिकायत क्रमांक 80 दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ताओं में रविकांत राय, विजय कुमार राय, सूरज प्रसाद राय, राजाराम राम, राजेंद्र राम, प्रमोद राम, अवनीकांत राय सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं।
शिकायत में मांग की गई थी—
राजस्व, कृषि एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच।
स्पेंट वॉश के वैज्ञानिक नमूने लेकर परीक्षण।
नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई।
खुले में अपशिष्ट फेंकने पर तत्काल रोक।
निरीक्षण हुआ, लेकिन क्या सिर्फ खानापूर्ति?
शिकायत के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि—
उन्हें निरीक्षण के समय सूचना तक नहीं दी गई।
शिकायतकर्ता को मौके पर बुलाए बिना जांच पूरी कर दी गई।
केवल पंचनामा तैयार कर औपचारिकता निभा दी गई।
वास्तविक स्थिति दर्ज नहीं की गई।
ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर लगभग 50 ट्रॉली स्पेंट वॉश खुले में पड़ा था, जबकि पंचनामे में कथित रूप से केवल 10 से 20 ट्रॉली का उल्लेख किया गया।
यदि यह आरोप सही है तो सवाल केवल प्रदूषण का नहीं बल्कि जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता का भी है।
वैज्ञानिक आर.पी. शुक्ला के हवाले से बड़ा सवाल
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक आर.पी. शुक्ला ने निरीक्षण के दौरान कहा कि एथेनॉल प्लांट से निकलने वाला स्पेंट वॉश नियमों के अनुसार कहीं भी खुले में नहीं फेंका जा सकता, चाहे वह फैक्ट्री परिसर के अंदर हो या बाहर।
इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि वीनस एग्रो फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा खुले क्षेत्रों और खदानों में अपशिष्ट डाला जाता रहा।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निरीक्षण के बाद कंपनी ने केवल कुछ ट्रॉलियां अपशिष्ट हटाकर औपचारिकता पूरी कर दी, जबकि शेष स्पेंट वॉश वहीं पड़ा रहा।
सबसे बड़ा सवाल—किसके दबाव में कार्रवाई सुस्त?
यदि रेड कैटेगरी उद्योग के खिलाफ इतने गंभीर आरोप सामने आने के बाद भी केवल पंचनामा बनाकर मामला समाप्त कर दिया जाता है तो कई सवाल खड़े होते हैं—
क्या पर्यावरणीय नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
क्या रेड कैटेगरी उद्योगों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी प्रभावी है?
शिकायतकर्ताओं को जांच से दूर क्यों रखा गया?
स्पेंट वॉश के वैज्ञानिक नमूने क्यों नहीं लिए गए?
यदि खुले में अपशिष्ट मिला तो तत्काल दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच होगी?
अब निगाहें कलेक्टर पर
पूरा मामला अब जिला कलेक्टर आशीष तिवारी के संज्ञान में है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित उद्योग, जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के विरुद्ध पर्यावरण कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच, वैज्ञानिक परीक्षण और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है—क्या रेड कैटेगरी उद्योग पर कानून का शिकंजा कस पाएगा, या पर्यावरणीय नियम एक बार फिर कागजों तक सीमित रह जाएंगे?
कटनी से सौरभ श्रीवास्तव की रिपोर्ट मो. 9131308097
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