इंदौर/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी की आगामी रणनीति को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। बैठक से निकलकर आए संकेतों ने खासतौर पर मौजूदा विधायकों के टिकट को लेकर हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी बड़े स्तर पर चेहरों में बदलाव कर सकती है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी करीब 70 से 75 मौजूदा बीजेपी विधायकों के टिकट पर कैंची चला सकती है। हालांकि, टिकट को लेकर अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व चुनावी परिस्थितियों, सर्वे रिपोर्ट और विधायकों के प्रदर्शन के आधार पर करेगा।
इंदौर के 4 से 5 विधायकों का टिकट कटने की चर्चा
इंदौर को लेकर भी बैठक के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों के मुताबिक, इंदौर जिले में बीजेपी के करीब 4 से 5 मौजूदा विधायकों के टिकट बदले जा सकते हैं। पार्टी संगठन स्तर पर विधायकों के कामकाज, जनता से संपर्क और क्षेत्र में सक्रियता को लेकर फीडबैक जुटा रहा है। अगर यह बदलाव होता है तो इंदौर की सियासत में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, अभी तक पार्टी की ओर से किसी विधायक का नाम सामने नहीं आया है और न ही टिकट काटने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा हुई है।
विधायकों को युवाओं से जुड़ने की नसीहत
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बीजेपी ने आने वाले समय की राजनीति को लेकर संगठन और जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट संकेत दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी विधायकों को युवाओं के बीच अपनी सक्रियता बढ़ाने और नई पीढ़ी से लगातार संवाद स्थापित करने की नसीहत दी गई है। पार्टी का फोकस अब केवल पारंपरिक वोट बैंक तक सीमित रहने के बजाय युवाओं को संगठन और राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ने पर है। इसके लिए विधायकों और स्थानीय नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने, उनकी समस्याओं को समझने और पार्टी की नीतियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
पहले से संगठन में बदलाव के संकेत
बीजेपी में हाल के दिनों में संगठनात्मक स्तर पर भी कई बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद विधायकों के टिकट में बड़े पैमाने पर बदलाव की चर्चा ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है। हालांकि, 70-75 विधायकों और इंदौर के 4-5 विधायकों के टिकट कटने की जानकारी फिलहाल सूत्रों के हवाले से है। पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक सूची या फैसला जारी नहीं किया गया है। चुनाव नजदीक आने के साथ ही सर्वे और संगठनात्मक रिपोर्ट के आधार पर तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।









