मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों को लेकर सियासी माहौल अचानक बेहद गर्म हो गया है. अब तक जिस चुनाव को सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया माना जा रहा था, वह अब दिलचस्प राजनीतिक मुकाबले में बदलता दिखाई दे रहा है. भोपाल से लेकर दिल्ली तक नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है और इसकी सबसे बड़ी वजह कांग्रेस की एक महिला विधायक को लेकर सामने आ रही चर्चाएं हैं. उनके रुख ने पूरे राजनीतिक समीकरण को नया मोड़ दे दिया है.
राज्यसभा चुनाव का गणित सीधा यहां समझें
विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो राज्यसभा चुनाव का गणित सीधा नजर आता है. मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं, जिनमें फिलहाल एक सीट रिक्त है. राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 58 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होती है. भाजपा के पास 165 विधायक हैं, इसलिए दो सीटें उसके खाते में लगभग तय मानी जा रही हैं. वहीं कांग्रेस के पास 63 विधायक हैं, जिससे वह एक सीट आसानी से जीत सकती है. इस हिसाब से मुकाबला साफ दिखाई दे रहा था, लेकिन अब राजनीतिक रणनीतियों ने स्थिति बदल दी है.
महिलाओं ने अपनाया अलग रुख
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की एक महिला विधायक पार्टी के भीतर रहते हुए अलग रुख अपनाए हुए हैं. यही वजह है कि भाजपा के रणनीतिकार अब तीसरी सीट को लेकर भी सक्रिय हो गए हैं. भाजपा के पास दो सीटों के बाद करीब 49 अतिरिक्त वोट बचते हैं और अब पार्टी की नजर उन संभावनाओं पर है जिनके जरिए तीसरी सीट पर मुकाबला खड़ा किया जा सके.
क्रॉस वोटिंग की संभावना तेज
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर हो रही है. राज्यसभा चुनाव में व्हिप उल्लंघन के नियम अलग होते हैं, इसलिए पार्टियां विधायकों की नाराजगी और व्यक्तिगत समीकरणों पर भी नजर बनाए रखती हैं. भाजपा को उम्मीद है कि अगर कांग्रेस के कुछ विधायक मतदान के दौरान अनुपस्थित रहते हैं या वोटिंग में गड़बड़ी होती है तो जीत का गणित बदल सकता है. इसके अलावा भाजपा की नजर कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों पर भी बताई जा रही है. लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे कुछ नेताओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं. यदि कुछ विधायक मतदान से दूरी बनाते हैं तो कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो सकती है. ऐसे में भाजपा अपने अतिरिक्त वोटों के दम पर तीसरी सीट पर भी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर सकती है.
छोटे दलों की भूमिका अहम
छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका भी इस चुनाव में अहम मानी जा रही है. भारत आदिवासी पार्टी के एक विधायक सहित कुछ अन्य संभावित समीकरणों पर भी नजर रखी जा रही है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर भाजपा कोई नया या निर्दलीय उम्मीदवार उतारती है तो मुकाबला और रोचक हो सकता है. अब तक सुरक्षित मानी जा रही कांग्रेस की सीट अचानक सस्पेंस में घिर गई है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस अपने विधायकों को पूरी तरह एकजुट रख पाएगी या फिर भाजपा कोई बड़ा राजनीतिक दांव चलकर मुकाबले को पलट देगी. फिलहाल मध्य प्रदेश की राजनीति में इसी मुद्दे की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है.
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