लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं का स्वीकृत लोड बिना पूर्व सूचना बढ़ाए जाने का मामला सामने आया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि पावर कॉर्पोरेशन ने करीब 47 लाख उपभोक्ताओं का बिजली लोड एकतरफा बढ़ा दिया, जिससे लाखों परिवारों पर अतिरिक्त बिजली बिल का बोझ पड़ सकता है। परिषद ने इस पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
गरीब उपभोक्ताओं का बढ़ सकता है मासिक बिजली बिल
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में करीब 1.70 लाख बीपीएल श्रेणी के बिजली उपभोक्ता हैं। पहले एक किलोवाट कनेक्शन पर उनका मासिक बिल करीब 300 रुपये आता था।
यदि किसी उपभोक्ता का लोड बढ़ाकर दो किलोवाट कर दिया गया है, तो उसे अब अधिक फिक्स्ड चार्ज और ऊर्जा शुल्क देना होगा। अनुमान है कि ग्रामीण बीपीएल उपभोक्ताओं का मासिक खर्च औसतन 165 रुपये और शहरी उपभोक्ताओं का करीब 435 रुपये तक बढ़ सकता है।
हजारों उपभोक्ता सब्सिडी से हो सकते हैं बाहर
उपभोक्ता परिषद का दावा है कि जिन 47 लाख उपभोक्ताओं का लोड बढ़ाया गया है, उनमें लगभग आधे स्मार्ट मीटर उपभोक्ता हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की है, जो पहले रियायती बिजली दर का लाभ ले रहे थे।
लोड बढ़ने के बाद कई उपभोक्ता सब्सिडी की पात्रता से बाहर हो गए, जिससे उनके बिजली बिल में सीधी बढ़ोतरी हो सकती है।
‘बिना नोटिस लोड बढ़ाना नियमों के खिलाफ’
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि किसी भी उपभोक्ता का स्वीकृत लोड बढ़ाने से पहले उसे सूचना देना जरूरी है।
उनका कहना है कि नियमों के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता लगातार तीन महीने तक स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली उपयोग करता है, तभी नोटिस देकर लोड बढ़ाने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इस मामले में उपभोक्ताओं को पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई।
स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर दोहरी मार का आरोप
उपभोक्ता परिषद ने यह भी आरोप लगाया है कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद भी उपभोक्ताओं से अधिकतम मांग के नाम पर जुर्माना वसूला जा रहा है। परिषद का कहना है कि एक ओर अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है और दूसरी ओर स्वीकृत लोड भी बढ़ा दिया गया है, जिससे स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। हालांकि, इस मामले में पावर कॉर्पोरेशन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ये खबर भी पढ़ें..
