Chhindwara Case: जहरीला कफ सिरप में केमिकल की मात्रा इतनी… कि हाथी की किडनी भी हो जाए फेल…. मध्य प्रदेश में जहरीला कफ सिरप पीने से अब तक 24 बच्चों की मौत हो चुकी है। लेकिन लोगों में जिज्ञासा बनी हुई है कि आखिर ऐसे कौनसे केमिकल है जोकि एक झटके में लोगों की किडनी और ब्रेन को डेड कर सकते है।
तो यह जानिये, जानकारों के अनुसार यदि इन केमिकल की मात्रा को घटना के अनुसार मिला दिया जाए, तो यह केमिकल इतना खतरनाक है कि हाथी जैसे बड़े जानवर की भी किडनी और ब्रेन को एक झटके में फेल कर सकता है। घटना में डाईएथिलीन ग्लायकॉल और एथिलीन ग्लायकॉल जैसे जहरीले रसायनों की मौजूदगी तय सीमा से 486 गुना मिलाया गया था। जोकि बेहद ही खतरनाक है।
आरोपी को चेन्नई से किया गिरफ्तार
मध्य प्रदेश में जहरीला कफ सिरप पीने से अब तक 24 बच्चों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। विपक्ष भी मामले में मुखरता से सवाल उठा रहा है। ऐसे में कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के डायरेक्टर गोविंदन रंगनाथन को मध्यप्रदेश की SIT की
टीम ने गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस मांगेगी आरोपी का रिमांड
पुलिस के मुताबिक SIT आरोपी रंगनाथन को चेन्नई कोर्ट में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड मांगेगी और फिर उसे छिंदवाड़ा लाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आरोपी पर था 20 हजार रुपये का इनाम
जहरीले कफ सिरप मामले में कंपनी के डायरेक्टर रंगनाथन पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। वो अपनी पत्नी के साथ फरार था। मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए चेन्नई में रंगनाथन का 2 हजार वर्ग फुट का अपार्टमेंट सील कर दिया गया था, जबकि कोडम्बक्कम स्थित उसका रजिस्टर्ड ऑफिस बंद था।
अब तक मरने वाले बच्चों की संख्या हुई 24
जहरीला कफ सिरप पीने के बाद किडनी फेल होने से जान गंवाने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 24 हो चुकी है। 8 अक्टूबर को छिंदवाड़ा की उमरेठ तहसील के पचधार गांव के 3 वर्षीय मयंक सूर्यवंशी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वो 25 सितंबर से नागपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती था।
केमिकल खरीदी में भी जमकर धांधली
SIT ने आरोपी के ठिकाने से दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिनमें जानकारी मिली है कि केमिकल खरीदी का न बिल था और न एंट्री। तमिलनाडु डायरेक्टर ऑफ ड्रग्स कंट्रोल की रिपोर्ट में सामने आया है कि यह सिरप नॉन फार्मास्यूटिकल ग्रेड केमिकल से तैयार किया गया था। जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी के मालिक ने दो बार में प्रोपलीन ग्लायकॉल के 50 किलो के दो बैग खरीदे थे। यानी कंपनी ने 100 किलो जहरीला केमिकल खरीदा था। वहीं भुगतान कभी कैश तो कभी गूगल पे से किया था।


