Tuesday, November 3, 2026
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कांग्रेस ने सूचनाएं रोकने का लगाया आरोप, RTI अधिनियम की 20वीं वर्षगांठ

बीजेपी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, कांग्रेस ने रखी कई मांगें

भोपाल/परवेज खान/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में बीजेपी सरकार को घेरने के कांग्रेस प्रयास रही है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है, हर मुद्दे पर कांग्रेस मैदान में आकर जनता तक अपनी बात पहुंचाने के प्रयास में लगी है। ऐसे में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की 20वीं वर्षगांठ पर कांग्रेस ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए, जोकि सूचनाओं रोकने से संबंधित थे। कांग्रेस का कहना है सच को सामने आने रोकने के प्रयास में बीजेपी अपनी पूरी ताकत लगा रही है।

RTI अधिनियम की 20वीं वर्षगांठ पर की पीसी
12 अक्टूबर 2025 को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की 20वीं वर्षगांठ के मौके पर भोपाल स्थित मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इसमें जिला कांग्रेस अध्यक्ष भोपाल (शहर) प्रवीण सक्सेना, आरटीआई प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पुनीत टंडन, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता श्री मिथुन अहिरवार मौजूद रहे। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार और सोनिया गांधी के दूरदर्शी नेतृत्व में 12 अक्टूबर 2005 को ऐतिहासिक सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम अस्तित्व में आया। यह यूपीए सरकार के अधिकार आधारित एजेंडा की पहली कड़ी थी, जिसमें मनरेगा (2005), वन अधिकार अधिनियम (2006), शिक्षा का अधिकार (2009), भूमि कॉन्फ्रेंस अधिग्रहण में उचित मुआवज़ा का अधिकार अधिनियम (2013) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013) शामिल थे। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों के पास मौजूद जानकारी तक पहुंच प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना था, ताकि शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सके, लेकिन बीजेपी सरका के राज में सूचना के अधिकार को सूचना रोकने के अधिकार में तब्दील किया जा रहा है।

बीजेपी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस ने अपने आरोपों में कई बिंदुओं को शामिल किया और बताया कि 2014 के बाद से RTI लगातार कमजोर की जा रही है। 2019 के संशोधन ने सूचना आयोगों की स्वायत्तता को कमजोर कर दिया। पहले, आयुक्तों का कार्यकाल 5 वर्ष का तय था और उनके सेवा शर्तें सुरक्षित थीं। संशोधन के बाद केंद्र सरकार को कार्यकाल और सेवा शर्तें तय करने का अधिकार दे दिया गया, जिससे स्वतंत्रता प्रभावित हुई और कार्यपालिका का प्रभाव बढ़ा। केंद्रीय सूचना आयोग आज अपनी अब तक की सबसे कमज़ोर स्थिति में है। स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल दो आयुक्त कार्यरत हैं, और सितंबर 2025 के बाद मुख्य आयुक्त का पद भी रिक्त है। इस तरह की स्थिति यूपीए शासन के दौरान कभी नहीं रही। व्हिसल ब्लोअर्स प्रोटेक्शन एक्ट पारित हुआ, पर लागू नहीं हुआ।

कांग्रेस ने सरकार के सामने रखी कई मांगें
1.2019 के संशोधनों को निरस्त कर सूचना आयोगों की स्वतंत्रता बहाल की जाए, और आयुक्तों के लिए 5 वर्ष का निश्चित कार्यकाल और सुरक्षित सेवा शर्ते सुनिश्चित की जाएं।

2.डीपीडीपी अधिनियम की उन धाराओं (धारा 44(3)) की समीक्षा व संशोधन किया जाए जो आरटीआई के जनहित उद्देश्य को कमजोर करती हैं।

3.केंद्र और राज्य आयोगों में सभी रिक्तियां पारदर्शी व समयबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से तुरंत भरी जाएं।

4.आयोगों के लिए कार्य निष्पादन मानक तय किए जाएं और निपटान दर की सार्वजनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य की जाए।

5.व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन अधिनियम को पूर्ण रूप से लागू कर आरटीआई उपयोगकर्ताओं और व्हिसलब्लोअर्स को सशक्त सुरक्षा प्रदान की जाए।

6.आयोगों में विविधता सुनिश्चित की जाए- पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और महिला प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।

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