रीवा/अरविन्द तिवारी/खबर डिजिटल/ थाने का नाम सुनते ही दिमाग में सख्त पुलिस और अपराधियों की पूछताछ का दृश्य उभरता है, लेकिन रीवा का अमहिया थाना इस छवि को बदल रहा है। यहां पुलिस अब बच्चों को डराने नहीं, बल्कि शिक्षित और संस्कारित करने का काम कर रही है। रीवा जिले के अमहिया थाना परिसर में हर वर्किंग डे पर एक अनोखा नज़ारा देखने को मिलता है। यहां पुलिसकर्मी न तो अपराधियों से उलझे हैं, न किसी से सख्ती दिखा रहे हैं बल्कि बच्चों के साथ क्लास लगा रहे हैं।
सामुदायिक पुलिसिंग की अनोखी पहल
थाने में रोजाना बच्चों के लिए शिक्षा, खेल और संस्कार की गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। नगर पुलिस अधीक्षक डॉ. रितु उपाध्याय की इस पहल का उद्देश्य है पुलिस और समाज के बीच दूरी को मिटाना, ताकि बच्चे पुलिस को अपना मित्र मानें। इस दौरान बच्चों को अनुशासन, शिष्टाचार और देशभक्ति के साथ-साथ यह भी सिखाया जाता है कि समाज के जिम्मेदार नागरिक कैसे बनें। फिजिकल एक्टिविटी और मोटिवेशनल सत्र के जरिए बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाया जा रहा है। बच्चे भी इस पहल से बेहद खुश हैं और कहते हैं अब पुलिस अंकल उनके मित्र हैं।
क्या है सामुदायिक पुलिसिंग?
सामुदायिक पुलिसिंग एक पुलिसिंग दर्शन है जो अपराध और सामाजिक अव्यवस्था को हल करने के लिए पुलिस और समुदाय के बीच साझेदारी पर केंद्रित है। इसमें अपराध की रोकथाम और नियंत्रण के लिए नागरिकों के साथ मिलकर काम करना, समस्याओं की पहचान करना, उनके मूल कारणों को खोजना और फिर उन समस्याओं को स्थायी रूप से कम करने या खत्म करने के लिए मिलकर समाधान लागू करना शामिल है।
साझेदारी और सहयोग: पुलिस और समुदाय के बीच एक साझेदारी स्थापित की जाती है, जिसमें दोनों पक्ष सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार के लिए मिलकर काम करते हैं।
समस्या-समाधान: यह केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय, सक्रिय रूप से अपराध की समस्याओं के मूल कारणों की पहचान करने और स्थायी समाधान विकसित करने पर जोर देती है।
समुदाय को सशक्त बनाना: यह नागरिकों को अपराध को रोकने के लिए जानकारी और उपाय प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाने पर भी ध्यान केंद्रित करती है।
दीर्घकालिक संबंध: अधिकारियों को एक ही क्षेत्र में लगातार काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है ताकि वे निवासियों के साथ मजबूत संबंध बना सकें।


