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Saturday, April 18, 2026
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तत्कालीन नपा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया का खामियाजा भुगत रहे 153 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी

जिम्मेदारों पर अमानत में ख़यानत का मामला हो दर्ज: संयुक्त संचालक ग्वालियर

चंदेरी/ भूमिका विश्वकर्मा/ खबर डिजिटल/ दीपावली से पहले नगर पालिका चंदेरी के153 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को हटाए जाने से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों में आक्रोश है और यह मामला तूल पकड़ते नजर आ रहा है जब मंगलवार जनसुनवाई में एसडीएम शुभ्रता त्रिपाठी के सामने नगर पालिका के लगभग 20 से 30 कर्मचारी आवेदन लेकर पहुंच बताया कि नपा के जिम्मेदारों द्वारा दीपावली से पहले हटा दिया है।

साथ ही यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि हमें पुनः रखा जाएगा या नहीं हटाने से पूर्व कई माहों का वेतन भी लेना शेष है कहा की यदि समय रहते हमारी समस्या का निराकरण नहीं किया गया तो हम लोग धर्म परिवर्तन कर लेंगे हालांकि इस मामले को लेकर एसडीएम शुभ्रता त्रिपाठी द्वारा समझा इस के साथ कहा गया कि धर्म परिवर्तन से वेतन और रोजगार का कोई संबंध नहीं है धर्म परिवर्तन करना व्यक्ति का अपना एक मौलिक अधिकार है किंतु मैं इसकी स्वीकृति नहीं प्रदान कर सकती अभी मुख्य नगर पालिका अधिकारी चंदेरी से बाहर हैं उनके आने के पश्चात ही इस बारे में विचार किया जाएगा।

नगर पालिका के कर्मचारियों द्वारा विधायक जगन्नाथ सिंह को जिम्मेदार ठहराया है जबकि विधायक रघुवंशी द्वारा विधानसभा में नगर पालिका कर्मचारी की भर्ती प्रक्रिया में शासन के निर्देशों के पालन एवं खराब आर्थिक स्थिति को लेकर पूछे गए प्रश्न पर राज्य शासन को भेजे गए जबाव और वर्ष 2000 में राज्य शासन द्वारा जारी आदेश की अवहेलना कर जिम्मेदारों द्वारा जानबूझकर शासन को व्यापक आर्थिक क्षतिहोने के कारण निर्मित हुई है।

राज्य शासन के आदेश को अनदेखा कर तात्कालिक अधिकारियों ने की थी नियम विरुद्ध कर्मचारी भर्ती

मध्य प्रदेश शासन वित्त विभाग (मंत्रालय) भोपाल द्वारा वर्ष 2000 में आदेश जारी कर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया गया था साथ ही यह भी उल्लेखित किया गया था कि जिन अधिकारियो के द्वारा शासन के आदेशों के विपरीत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की नियुक्तियां की जाएगी उन अधिकारियों से ही कर्मचारियों के वेतन भत्ते ,मजदूरी तथा न्यायालीन प्रकरणों में प्रतिरक्षण पर आने वाले खर्चों की वसूली की जाएगी।

किन अधिकारियों ने की कर्मचारियों की नियम विरुद्ध भर्ती

राज्य शासन द्वारा वर्ष 2000 से ही दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की नियुक्तियों पर पूर्णत प्रतिबंध लगाया गया था वर्ष 2000 के पश्चात की काल अवधि में जिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा 10 से अधिक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की नियुक्ति अपने कार्यकाल के दौरान की है उन पर ब्रीच आफ ट्रस्ट (अमानत में ख़यानत)का मुकदमा चलाए जाने का आदेश पारित किया गया था किंतु तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों ने राज्य शासन के आदेश को दरकिनार कर नियम विरुद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया को अंजाम दिया जिसमें तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी आनंद शर्मा (मूल पद लेखपाल ) वर्तमान पद स्थापना प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी पिछोर जिला शिवपुरी के कार्यकाल में 24 कर्मचारी तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी चंदेरी कु. विश्वनाथ प्रताप सिंह वर्तमान पद स्थापना ग्वालियर संभाग से बाहर के कार्यकाल में 29 कर्मचारी तथा सेवानिवृत अधिकारियों में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी हीरालाल अहिरवार द्वारा 28 कर्मचारी, विद्या रतन सोलंकी द्वारा 16 कर्मचारी तथा के के पटेरिया द्वारा 65 कर्मचारियों की नियुक्तियां शासन आदेश के विरुद्ध की गई थी।

क्या तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारियों पर अमानत में ख़यानत का मुकदमा चलेगा होगी वसूली

कार्यालय संयुक्त संचालक नगरी प्रशासन एवं विकास ग्वालियर द्वारा अक्टूबर 2025 में जारी पत्र के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि चंदेरी में पदस्थ रहे तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी कुंवर विश्वनाथ प्रताप सिंह आनंद शर्मा , के के पटेरिया ने शासनादेश के विरुद्ध दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी नियुक्ति अपने कार्यकाल के दौरान वर्ष 2000 के बाद की है यह स्पष्ट उल्लेखित किया गया है कि जिन अधिकारियों ने शासन के आदेशों के विरुद्ध दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की नियुक्तियां की है उनसे इन कर्मचारियों का वेतन भत्ते मजदूरी आदि तथा उनके प्रकरणों में न्यायालय में प्रतिरक्षण पर आने वाले खर्चों की वसूली नियोक्ता अधिकारियों से की जाए साथ ही जिन अधिकारियों ने 10 से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति इस अवधि में की है उनके विरुद्ध ब्रीच आफ ट्रस्ट (अमानत में खयानत) का आपराधिक मुकदमा चलाया जाए ।

अब देखना यह हुआ कि कार्यालय संयुक्त संचालक के द्वारा जारी पत्र के पश्चात जिन जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर शासनादेश की अवहेलना कर कर्मचारियों की नियुक्तियां कर शासन को व्यापक स्तर पर आर्थिक क्षति पहुंचाई है उन पर अमानत में ख़यानत का अपराधिक प्रकरण दर्ज कर वसूली कार्रवाई की जाएगी या नहीं विचारणीय होकर जांच योग्य भी है।

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